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हिमाचल में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में हेरफेर करने पर तहसीलदार और पटवारी समेत 6 लोगों पर FIR दर्ज

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 02 Sep 2026 03:21 PM (IST)

हिमाचल के बिलासपुर जिले के झंडूता में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को बचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस जांच जारी है।

बिलासपुर में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ पर तहसीलदार व पटवारी समेत 6 लोगों पर मामला दर्ज हुआ है। प्रतीकात्मक फोटो

बिलासपुर में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ पर तहसीलदार व पटवारी समेत 6 लोगों पर मामला दर्ज हुआ है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे बचाने को रिकॉर्ड में हेरफेर।

  2. तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी सहित छह लोगों पर FIR दर्ज।

  3. न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने जांच शुरू की।

जागरण संवाददाता, झंडूता (बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के झंडूता क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जे को बचाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में भारी हेरफेर का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी झंडूता के कड़े रुख के बाद पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी और रिकॉर्ड कीपर समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

अवैध कब्जेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप

शिकायतकर्ता धनी राम (निवासी गांव खेड़ी) के अनुसार, उनके दिवंगत भाई ने वर्ष 2008 में खसरा नंबर 146/98 की करीब एक बीघा दस बिस्वा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी।इसके बाद चले बेदखली मामले की मूल फाइल (मिसल नंबर 31/13) को तहसील कार्यालय से रहस्यमयी परिस्थितियों में गायब कर दिया गया।

आरोप है कि स्थानीय लंबरदार और कब्जाधारियों ने तत्कालीन तहसीलदार व रिकॉर्ड कीपर से मिलीभगत कर पुरानी फाइल को नष्ट करवाया।

फर्जी मिसल बनाकर घटा दिया कब्जे का दायरा

शिकायतकर्ता की ओर से लगातार पैरवी करने के बाद 2021 में एक नई मिसल (नंबर 19/21) तैयार की गई। इसमें तत्कालीन पटवारी की संलिप्तता से अतिक्रमण के रकबे को एक बीघा दस बिस्वा से घटाकर महज दस बिस्वा दर्शा दिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति के अनुसार कब्जा दो बीघा से अधिक भूमि पर है।

अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद ली कोर्ट की शरण

वर्षों तक प्रशासनिक तंत्र के चक्कर काटने और 28 जनवरी 2026 को दी गई शिकायत पर भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने 31 अगस्त 2026 को पुलिस को केस दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए, जिसके आधार पर झंडूता थाना पुलिस ने 1 सितंबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले के मुख्य बिंदु

ये हैं आरोपित

तत्कालीन तहसीलदार (2016-17), तत्कालीन रिकॉर्ड कीपर, तत्कालीन पटवारी (2021) और गांव खेड़ी के तीन नागरिक।

यह हैं मुख्य आरोप

सरकारी रिकॉर्ड से मूल फाइल गायब करना, फर्जी मिसल तैयार करना और अवैध कब्जे का रकबा कागजों में कम दिखाना।

न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरी गहनता से राजस्व रिकॉर्ड और मिलीभगत की जांच कर रही है। इस भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
-अभिषेक धीमान, एसपी, बिलासपुर।

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