न चाहते हुए भी बार-बार अनचाहे विचारों का मन में उमड़ना-घुमड़ना एक मनोरोग है। इस रोग को अब दूर किया जा सकता है....

किसी के मन में तरह-तरह के विचार हर समय ही आते रहते हैं।सामान्यत: ये विचार तनावरहित ढंग से मस्तिष्क में बनते-बिगड़ते रहते हैं। अंतत: ये विचार व्यक्ति की सोच में व्यापकता व दिशा प्रदान करते हैं। जब

कोई व्यक्ति ऑब्सेशन नामक मानसिक रोग से पीड़ित होता है, तो उसके मन में विचार दिशाहीन तरीके से बार-बार आते हैं। ऐसे में रोगी न चाहते हुए भी इन व्यर्थ के विचारों में उलझा रहता है और गंभीर तनाव महसूस करता है। किसी न भूलने वाली यातना की तरह से अनचाहे विचार रोगी के सामाजिक व व्यावसायिक जीवन तक को नष्ट कर सकते हैं।

लक्षण

- रोगी के न चाहते हुए भी मन में बार-बार विचार आना।

- ये विचार हमेशा नकारात्मक, अनैतिक व मन को दूषित करने वाले होते हैं और रोगी में गंभीर उलझन, बैचैनी व घबराहट पैदा करते हैं।

- रोगी चाह कर भी इन विचारों को मन से हटा नहीं पाता है।

- इन दूषित विचारों से परेशान होकर रोगी अनेक उल्टी-सीधी बार-बार दोहराने वाली हरकतें करने लगता है।

- नकारात्मक विचार: रोगी के मन में हर वक्त नकारात्मक सोच पनपती रहती है। रोगी को लगता है कि वह कुछ भी करेगा, तो उसका परिणााम कुछ गलत ही निकलेगा।

- अपनों व परिचितों के लिए हर वक्त अनचाहे व अप्रिय विचार आना।

हर वक्त यह दहशत बनी रहना कि परिजन के साथ कोई अप्रिय घटना न हो

जाए।

- स्वास्थ्य को लेकर हर वक्त विचलित करने वाले विचार आना। रोगी को लगता

है कि कहीं उसे हार्ट अटैक, कैंसर, संक्रमण या एड्स जैसा कोई गंभीर रोग न हो जाए। ऐसे में रोगी बार-बार डॉक्टरों से मिलता है और तरह-तरह की जांचें करवाता रहता है।

- पूजा अर्चना करते समय मन में अपवित्र व मन को दूषित करने वाले विचारों का आना। रोगी को लगता है कि

उसने ईश्वर से कोई गलत मन्नत मांग ली है।

इलाज

- अनचाहे विचारों के इलाज में मनोचिकित्सा, पारिवारिक सहयोग व दवाओं का महत्वपूर्ण स्थान है।

- मनोचिकित्सा के दौरान रोगी को विकृत, अनचाहे बेचैन करने वाले विचारों को सामान्य विचारों से अलग पहचानने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बाद रोगी मनोचिकित्सक की सहायता से इन विचारों से

निपटने की सही तकनीक का अभ्यास करते हैं।

- चूंकि तंबाकू, गांजा, भांग, नींद की गोलियां व शराब के सेवन से ऐसे विचार और अधिक पनपते

हैं। इसलिए रोगी को इनसे दूर रहने की सलाह दी जाती है।

- दवाएं: मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह पर ली गई दवाओं की सहायता से ऐसे

अनचाहे विचारों पर कारगर रूप से काबू किया जा सकता है। दवाओं के सेवन से

सीमित समय में ही रोगी अपने कामकाज व व्यवसाय को सुचारु रूप से करने लगता है।

- आम धारणा के विपरीत इन आधुनिक दवाओं के सेवन से रोगी को किसी भी प्रकार की लत नहीं पड़ती और न ही इनसे किसी भी प्रकार की सुस्ती पैदा होती है।

डॉ. उन्नति कुमार एम.डी. मनोरोग विशेषज्ञ

unnatikumar@hotmail.com

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Posted By: Babita kashyap