यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
तंग हो रही जेल, क्षमता 17930, बंदी 18444
जागरण संवाददाता, यमुनानगर : हमेशा सुरक्षा को लेकर चर्चा में रहने वाली प्रदेश की जेलों में

जागरण संवाददाता, यमुनानगर : हमेशा सुरक्षा को लेकर चर्चा में रहने वाली प्रदेश की जेलों में बंदियों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई है। प्रदेश की 19 में से 11 जेलें तो ऐसी हैं, जो फुल हो गई हैं। इसके बावजूद उनमें बंदियों को जबरदस्ती ठूंसा जा रहा है। 11 जेलों में 5523 बंदियों को रखा जा सकता है, परंतु इस वक्त उनमें 6895 बंदी बंद है यानी क्षमता से 1372 अधिक। काफी समय से जेलों की संख्या और क्षमता बढ़ाने की बात कही जा रही है, परंतु इस दिशा में कोई ठोस कदम उठता नहीं दिख रहा।
सोने में दिक्कत
संख्या बढ़ने से सबसे ज्यादा दिक्कत बंदियों को रात के वक्त होती है, क्योंकि रात को उन्हें बैरक में बंद कर रखना होता है। दिन में तो बंदी जेलों में काम करते रहते हैं, इसलिए दिन में इतनी परेशानी नहीं होती, परंतु जब रात को बंदी अपने बैरक में सोते हैं, तो उन्हें टस से मस होने की जगह भी नहीं मिलती। अब सर्दी बढ़ने वाली है, इसलिए दिक्कत ओर भी ज्यादा बढ़ सकती है। प्रदेश की 19 जेलों में 17930 बंदी रखने की क्षमता है, परंतु इस वक्त इनमें 18444 बंदी हैं। उनमें 17695 पुरुष और 749 महिलाएं हैं।
11 जेलों में यह है संख्या
रोहतक की जेल में 1300 बंदियों को रखने की क्षमता है, परंतु इसमें 13439 बंदी रखे गए हैं। इसी तरह हिसार में 405 की जगह 575, भिवानी में 561 की जगह 774, सिरसा में 567 की जगह 779, सोनीपत में 645 की जगह 924, जींद में 669 की जगह 701, कुरुक्षेत्र में 446 की जगह 514, नारनौल में 350 की जगह 485, रेवाड़ी में 30 की जगह 93, कैथल में 515 की जगह 564 और पानीपत में 35 की जगह 47 बंदी-कैदी हैं। हालांकि यमुनानगर की जिला जेल में ऐसी स्थिति नहीं है। यहां 1200 बंदियों को रखने की क्षमता है, परंतु इस वक्त इसमें 888 बंदी हैं।
11171 बंदी विचाराधीन
प्रदेश की जेलों में जो बंदी बंद हैं, उनमें से 11171 बंदी विचाराधीन है। उनमें 10731 पुरुष और 440 महिलाएं शामिल हैं, जबकि उम्र कैद काट रहे पुरुषों की संख्या 3438 और 190 महिलाएं हैं। विचाराधीन बंदियों के केस सालों से न्यायालय में चल रहे हैं। केसों की सुनवाई में देरी होने से भी जेलों में बंदियों की संख्या में बढ़ती जा रही है।
बना रही नई जेल : सीपीएस
मुख्य संसदीय सचिव (जेल विभाग) श्याम¨सह राणा का इस बारे में कहना है कि पानीपत में नई जेल बनाई जा रही हैं। नई जेल बनने के बाद बंदियों को उनमें शिफ्ट किया जाएगा। जेलों में सजा काट रहे बंदी अक्सर छुट्टी पर जाते रहते हैं, इसलिए इतनी दिक्कत नहीं है।