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जागरण संवाददाता, यमुनानगर : ट्विन सिटी के विकास की चर्चा के लिए नौ माह बाद भी हाउस की बैठक नहीं हो पाई। जबकि पक्ष व विपक्ष के पार्षद बैठक के लिए दबाव बना रहे हैं। पार्षदों का आरोप हैं कि जब दूसरे जिलों में हाउस की बैठक हो सकती है और रैलियां हो सकती हैं तो यहां मीटिग क्यों नहीं हो सकती। अधिकारी भी शायद पार्षदों के तीखे सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं, इसलिए उन्होंने नया फार्मूला निकाला है। विभिन्न वार्डों में होने वाले कार्यों का प्रस्ताव तैयार कर सभी पार्षदों के घर कर्मचारी के हाथ भेजा जा रहा है। कर्मचारी इस पर पार्षद की सहमति के हस्ताक्षर करवा कर लाता है। पार्षदों के साइन होते ही करीब 10 करोड़ रुपये से होने वाले इन कार्यों को मंजूरी दे दी जाएगी। अलग-अलग कार्यों से संबंधित छह एजेंडे अब से पहले भेजे जा चुके हैं। इन कामों पर मांगी सहमति

शहर की चारों दिशाओं में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से प्रवेश द्वार बनवाने, वार्ड नंबर-19, 20, 21

में दो करोड़ 33 लाख रुपये की लागत से नालियां व गलियों का निर्माण, वार्ड नंबर-18 में दो करोड़ 33 लाख रुपये की लागत से गलियां व नालियां, वार्ड 20, 21 व 22 में गलियों व नालियों का निर्माण। इसी तरह वार्ड 18 में एक रोड़ 60 लाख, वार्ड 22 में 2 करोड़ 48 लाख व वार्ड 22 में ही 2 करोड़ आठ लाख रुपये की लागत से अन्य कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से संबंधित एजेंडे पार्षदों के पास प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजे जा रहे हैं। 23 माह में नगर निगम हाउस की केवल तीन बैठकें हुई। चिताजनक यह है कि जिन कार्यो को पहली बैठक में मंजूरी मिली, वह भी आज तक शुरू नहीं हो पाए। सात जनवरी 2019 को मेयर व पार्षदों ने शपथ ली थी। पहली बैठक छह माह बाद 20 जून को हुई। उसके बाद काफी हो-हल्ला करने के बाद दूसरी बैठक 11 सितंबर को हुई। तीसरी बैठक सात जनवरी 2020 को हुई। चौथी बैठक बुलाने की तैयारी जरूर हुई, लेकिन फाइलों तक ही सीमित रही। विपक्ष का यह तर्क

विपक्ष के कुछ पार्षदों का कहना है कि हाउस की बैठक बुलाई जानी चाहिए ताकि शहर में होने वाले विकास कार्यों पर चर्चा हो सके। अब प्रशासनिक स्वीकृति के लिए एजेंडे की कॉपी घर भेजी जा रही हैं। हालांकि यह तरीका सही नहीं है, लेकिन शहर के विकास में अड़चन न आए, इसलिए उन्होंने स्वीकृति देना ही मुनासिब समझा। दूसरा पहलू यह है कि यदि सत्ता पक्ष बहुमत में है। यदि विपक्ष स्वीकृति न भी दे तो सत्ता पक्ष के पार्षदों की संख्या पर्याप्त है। फोटो : 3

निगम में चल रही अफसरों की मनमानी

नौ माह बाद बैठक बुलाई जा रही है, लेकिन पिछली बैठक में जो प्रस्ताव पास हुए थे, उन पर आज तक अमल नहीं हुआ। नगर निगम में पूरी तरह अफसरों की मनमानी चल रही है। ममीदी गांव में ग्रीन बेल्ट बनाने का काम रुका पड़ा है। इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। हाउस की बैठक में जवाबदेही से बचने के लिए अब एजेंडे की कॉपियां स्वीकृति के लिए घर भेजी जा रही हैं।

निर्मल चौहान, पार्षद फोटो : 4

विरोध से बचने का तरीका

अधिकारी हाउस की बैठक बुलाने से बच रहे हैं। पहले एजेंडे दिए थे, लेकिन कोरोना के चलते मीटिग स्थगित हो गई थी। शहर में हो रहे विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। पार्षदों के विरोध से बचने के लिए अब हाउस की बैठक बुलाने से गुरेज किया जा रहा है।

विनोद मरवाह, पार्षद फोटो : 5

बुलाई जाए बैठक

जनवरी माह में हाउस की तीसरी बैठक हुई थी। अब नौ माह बीत जाने के बावजूद हाउस की बैठक नहीं बुलाई जा रही है। सत्ता पक्ष के अन्य कार्यक्रम व बैठकें हो रही हैं। अधिकारियों के पास पार्षदों के सवालों के जवाब नहीं हैं, इसलिए हाउस की बैठक बुलाने से बचा जा रहा है। बैठक में पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं। लाइटों व सफाई तक की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।

विनय कांबोज, पार्षद

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