संवाद सहयोगी, बिलासपुर : गेहूं से भरी जिस गाड़ी को पुलिस ने दो दिन पहले पकड़ा था उसे खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के कहने पर छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने तर्क दिया है कि डिपो होल्डर गेहूं को गोदाम से अपने डिपो की तरफ ले जा रहा था। जबकि पुलिस ने गेहूं की गाड़ी को डिपो के विक्रय केंद्र से लोड होने के बाद पकड़ा था। ऐसे में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की जांच व कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। इससे तो साफ पता चलता है कि डिपो होल्डर को बचाने के लिए बड़ा खेल खेला गया है।

गाड़ी दो दिन थाने में क्यों रही

4 अगस्त को दोपहर बाद पुलिस हड़तौल रोड से गेहूं से भरी गाड़ी को पकड़ कर थाने ले गई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि यह गेहूं बीपीएल परिवारों का है और डिपो होल्डर इसे बाजार में बेचने के लिए जा रहा था। परंतु डीएफएससी के फूड इंस्पेक्टर जयकिशन रंगा ने थाने में लिख कर दिया है कि डिपो होल्डर के पास गेहूं शिफ्ट करने की अनुमति थी। यदि डिपो होल्डर के पास अनुमति थी तो 25 से 30 ¨क्वटल गेहूं से भरी गाड़ी दो दिन तक थाने में क्यों खड़ी रही। जबकि अनुमति के कागज गाड़ी के साथ होने चाहिए थे। दो दिन तक डिपो होल्डर व फूड इंस्पेक्टर थाने में अपने कागज लेकर क्यों नहीं गए। जबकि सच्चाई ये है कि अधिकारियों ने दो दिन ये सोचने में लगाए की आखिर इस मामले को रफा दफा कैसे किया जाए।

एक ही है गोदाम और विक्रय केंद्र

अधिकारियों का तर्क है कि डिपो होल्डर गेहूं को अपने गोदाम से डिपो की तरफ ले जा रहा था। लेकिन इसमें कतई भी सच्चाई नहीं है। डिपो होल्डर ने हड़तौल रोड पर स्थित अपने गोदाम को ही विक्रय केंद्र बनाया हुआ था। इस बात की गवाही डिपो से राशन लेने वाले लोग भी दे रहे हैं। क्योंकि राशन का वितरण एक ही जगह होता है न की दो जगह। अधिकारियों ने जल्दबाजी में थाने में लिख कर तो दे दिया लेकिन क्या लिखना था इसमें उलझ गए।

गोदाम की बात आते ही टाल गए

फूड इंस्पेक्टर बिलासपुर जयकिशन रंगा से बात की तो उन्होंने कहा कि डिपो होल्डर को गोदाम की अनुमति डीएफएससी से मिली थी। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि जिसे वो गोदाम बता रहे हैं वहां तो राशन वितरण होता था तो उन्हें आवाज सुननी बंद हो गई। उन्होंने कहा मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है। हैलो, हैलो कह कर उन्होंने फोन काट दिया।

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