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हरियाणा में बची रोटियों से शुरू हुआ था रोटी बैंक, अब 20 हजार लोगों तक पहुंचा भोजन

Published: Sun, 08 Nov 2026 08:04 AM (IST)

यमुनानगर की प्रिया अरोड़ा ने 17 साल की उम्र में 'रोटी बैंक' शुरू किया, जो अब शांति फाउंडेशन के माध्यम से 20 हजार जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचा रहा है।

यमुनानगर की प्रिया अरोड़ा का रोटी बैंक 20 हजार लोगों को खिला रहा भोजन।

यमुनानगर की प्रिया अरोड़ा का रोटी बैंक 20 हजार लोगों को खिला रहा भोजन।

HighLights

  1. प्रिया अरोड़ा ने 17 साल की उम्र में रोटी बैंक शुरू किया

  2. यह पहल अब 20 हजार जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचा रही है

  3. 25 सहयोगी अपनी आजीविका से समाजसेवा में सक्रिय योगदान देते हैं

जागरण संवाददाता, यमुनानगर। दीपावली पर घरों में मिठाइयां और पकवान बनते हैं। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटते हैं, लेकिन कई लोगों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल होता है। भोजन की बर्बादी रोककर जरूरतमंदों तक खाना पहुंचाने की सोच के साथ ग्रीन विहार कालोनी की प्रिया अरोड़ा ने महज 17 साल की उम्र में रोटी बैंक शुरू किया।

गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज में सहेलियों के टिफिन से बची रोटियां जुटाने से शुरू हुई यह पहल अब शांति फाउंडेशन के माध्यम से 20 हजार लोगों तक पहुंच चुकी है। प्रिया की इस मुहिम में 25 सहयोगी जुड़े हैं, जो नौकरी और कारोबार के साथ समाजसेवा करते हैं। टीम के सदस्य इस काम के लिए वेतन नहीं लेते और अपनी आजीविका से ही सहयोग करते हैं।

सहेलियों के टिफिन से जुटीं 500 रोटियां

प्रिया गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज में पढ़ती थीं। उन्होंने देखा कि छात्राएं टिफिन में बची रोटियां घर ले जाती हैं। उन्होंने अपनी कक्षा से रोटियां जुटाना शुरू किया। तत्कालीन प्रिंसिपल और वर्तमान कॉलेज निदेशिका डॉ. विरेंद्र गांधी के सहयोग से यह पहल पूरे कॉलेज में फैल गई। छात्राएं घर से भी रोटियां लाने लगीं और रोजाना करीब 500 रोटियां जुटने लगीं। इन्हें कुष्ठ आश्रम, रेलवे स्टेशन, झुग्गियों और बस्तियों में रहने वाले जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया।

कार से शुरू हुआ वितरण, फिर बनी फूड वैन

शुरुआत में प्रिया अपनी कार से भोजन बांटती थीं। बाद में छात्राएं, पड़ोसी और पुराने सहपाठी भी मुहिम से जुड़ गए। भोजन जुटाने और बांटने के लिए फूड वैन की व्यवस्था की गई। 13 सितंबर 2018 को डॉ. विरेंद्र गांधी ने इसका शुभारंभ किया और इस पहल को रोटी बैंक नाम दिया। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी प्रिया ने सेवा जारी रखी। अब टीम में 15 सक्रिय सदस्य और दस अन्य सहयोगी हैं, जो अपनी उपलब्धता के अनुसार जिम्मेदारी संभालते हैं।

होटल, धर्मशालाओं और मैरिज पैलेसों से संपर्क

प्रिया इंटरनेट मीडिया के माध्यम से लोगों से अपील करती हैं कि घरों और आयोजनों में बचा भोजन फेंकने के बजाय रोटी बैंक को दें। टीम ने होटल, धर्मशालाओं और मैरिज पैलेसों से भी संपर्क किया है। कई लोग खुद फोन कर बचे भोजन की जानकारी देते हैं। सदस्य नौकरी और कारोबार से समय निकालकर भोजन लेने और बांटने पहुंचते हैं। खाना साफ तरीके से पैक कर जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है। वितरण के वीडियो भी साझा किए जाते हैं, ताकि दानदाताओं को भोजन के सदुपयोग का भरोसा रहे।

राशन उपलब्ध कराता है रोटी बैंक

रोटी बैंक जरूरतमंद परिवारों को राशन भी देता है, लेकिन नकद सहायता नहीं की जाती। भोजन वितरण और अन्य सेवा कार्यों का खर्च शांति फाउंडेशन के दानदाताओं और टीम सदस्यों के सहयोग से पूरा होता है। सदस्य इस काम के लिए वेतन नहीं लेते, बल्कि अपनी कमाई से आर्थिक सहयोग करते हैं।

कोविड में रोज 2200 लोगों तक पहुंचाया भोजन

कोरोना महामारी के दौरान टीम ने रोजाना करीब 2000 से 2200 लोगों के भोजन की व्यवस्था की। जरूरतमंदों को आक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया। इसके अलावा झुग्गियों में महिलाओं को सेनेटरी पैड, कुष्ठ आश्रम और वृद्धाश्रम में कंबल व अन्य जरूरी सामान व स्कूलों में बच्चों को स्टेशनरी बांटी जाती है। इन सेवा कार्यों के लिए प्रिया को जिलास्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित किया जा चुका है।

प्रिया ने कहा कि समाज में कुछ लोगों के पास जरूरत से ज्यादा भोजन है, जबकि कुछ को भरपेट खाना नहीं मिल पाता। भोजन की बर्बादी रोककर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाना सबकी साझा जिम्मेदारी है। दीपावली पर खुशियां बांटने के साथ किसी जरूरतमंद का पेट भरना भी त्योहार की खुशी बढ़ा सकता है।

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