जागरण संवाददाता, यमुनानगर : कोरोना संक्रमण का खतरा अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञ एक बार फिर कोरोना की तीसरी लहर आने का अंदेशा जता चुके हैं। इसे देखते हुए ही अब जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग भी तैयारियों में जुट गया है। सिविल अस्पताल व ईएसआइ अस्पताल में 60 बेड का पीकू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) बनाने की तैयारी चल रही है। फिलहाल 16 बेड का नीकू (नियो नेटल इंटेसिव केयर यूनिट) भी संचालित है। हालांकि बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसके लिए कोविड वार्डों में तैनात चिकित्सकों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।

तीसरी लहर में बच्चों के भी चपेट में आने की आशंका है, क्योंकि 18 प्लस वाले सभी लोग कोरोना को लेकर जागरूक है। वह नियमों का पालन भी कर रहे हैं, लेकिन बच्चे इतना ध्यान नहीं दे पाते। एक वजह यह भी है कि युवा व बुजुर्गों को वैक्सीन की डोज लग रही है। उनमें एंटी बाडी बन रही है। इसे देखते हुए अब बच्चों के बचाव के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। पीकू वार्ड में कोरोना संक्रमित बच्चों को वेंटिलेटर से लेकर आक्सीजन तक की सुविधा प्रदान की जाएगी। जिला अस्पताल में बनाए जाने वाले पीकू वार्ड में आठ आइसीयू बेड लगेंगे। यमुनानगर-जगाधरी के जिला अस्पताल में तीन बाल रोग विशेषज्ञ तैनात है। एक बाल रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल में तैनात है।

फिलहाल कोरोना का खतरा कम

जिले में इस समय कोरोना का खतरा कम होता जा रहा है। रोजाना आने वाले संक्रमित केसों की संख्या भी घट रही है। मरीज भी ठीक हो रहे हैं। रविवार को जिले में किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई। रिकवरी दर भी बढ़कर 97.50 फीसद पर पहुंच चुकी है।

सीएचसी व पीएचसी पर फिलहाल नहीं कोई व्यवस्था

दूसरी लहर ने ग्रामीण क्षेत्रों को भी अधिक प्रभावित किया। हालात बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग को गांवों में आइसोलेशन सेंटर भी बनाने पड़े। गांवों में मौतें भी हुई। लोग बीमारी से जूझते रहे। हालांकि अब हालात सामान्य हैं। यदि तीसरी लहर गांवों तक पहुंची, तो दिक्कत बढ़ सकती है, क्योंकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहले से ही मानव संसाधनों की कमी है। बाल रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं है। जिले में मात्र चार ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं। सिविल सर्जन डा. विजय दहिया ने बताया कि तीसरी लहर से निपटने की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी गई है। कुछ बच्चों के बेड भी बढ़ाए जा रहे हैं। सिविल अस्पताल व ईएसआइ में बेड बढ़ाए जाएंगे। वैसे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है। इसके बावजूद अभिभावकों को उन्हें कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने पर ध्यान देना होगा।

Edited By: Jagran