जागरण संवाददाता, यमुनानगर : नगर निगम के अफसर पार्षदों की बात सुनना तो दूर फोन तक नहीं उठाते। इसका पार्षदों को मलाल है। हाउस की दूसरी बैठक में न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के पार्षदों का भी गुस्सा अधिकारियों पर फूटा। आरोप है कि कई-कई बार लिखित में शिकायत दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं करते। उनके कहने से पैच वर्क व नाली की सफाई तक नहीं होती। पार्षदों की इस शिकायत पर नगर निगम आयुक्त व जिला उपायुक्त ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश जारी किए कि यदि जन प्रतिनिधियों की मिस कॉल भी आए तो आपने कॉल करनी है। भविष्य में यदि ऐसी कोई शिकायत आई तो कार्रवाई होगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। इनसेट

तीन बार लिखित में दिया, एस्टमेट तक नहीं लगे

वार्ड नंबर- 13 से पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि हाउस की पहली बैठक में पास हुए विकास कार्यों बारे तीन बार अधिकारियों व मेयर को लिखित में दिया। अब तक कोई कार्रवाई नहीं। कई माह से मांग कर रही हूं कि उसके वार्ड से सफाई का टेंडर रद हो। सफाई का जिम्मा नगर निगम कर्मचारियों को सौंपा जाए। लाडली पार्क के रास्ते पर कचरे के ढेर लगे हैं। कचरा उठाने के साथ-साथ मिट्टी भी उठाई जा रही है। लेकिन अधिकारी नहीं सुन रहे हैं। इनसेट

वार्ड नंबर 21 से भाजपा पार्षद अभिषेक शर्मा यहां तक कह गए कि क्या मेरे वार्ड की जनता बेवकूफ है? एक भी काम का नया टेंडर नहीं लगा है। न बैंच रखे गए, न लाइट की व्यवस्था है। हमारे वार्ड के साथ आखिर यह भेदभाव क्यों? इनसेट

वार्ड नंबर सात से भाजपा पार्षद राम आसरे ने कहा कि एमई व एक्सइएन मेरे पड़ोसी हैं। मेरे कहने से आज तक एक सड़क की पैचवर्क नहीं हुई। हुडा की सड़कें टूटी पड़ी हैं। रेत डालकर राहगीरी का कार्यक्रम करवाया। न सफाई की व्यवस्था है और न ही निकासी की। अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया, लेकिन आज तक किसी ने नहीं सुनीं। हमारी ही नहीं सुनते तो किसकी सुनेंगे। यह सोचकर हम भी हैरान हैं। इनसेट

वार्ड नंबर-5 से कांग्रेस पार्षद विनय कांबोज का कहना है कि मेरे वार्ड में सफाई कर्मचारी कभी-कभार ही दिखाई देता है। नालों की सफाई नहीं है। कचरे के ढेर लगे हुए हैं। अफसर फोन तक नहीं उठाते। शिकायत को दूर करना तो बड़ी बात है। ओपन जिम चुनिदा वार्डों के पार्कों तक ही सीमित रह गए हैं। यही शिकायत वार्ड नंबर-3 की पार्षद हरमीन कौर की थी। इनसेट

बैठक से एक दिन पहले नाले का दौरा

वार्ड नंबर-15 से पार्षद प्रिस शर्मा का कहना है कि नाले के निर्माण का काम कई माह से अटका हुआ है। अधिकारियों को कई बार लिखित में दिया। हाउस की बैठक बुलाने से एक दिन पहले एक्सइएन ने दौरा किया। यहां तक भगवान परशुराम चौक का नाम बदलने के नाम पर महज खानापूर्ति हुई। आनन-फानन में फ्लैक्स बोर्ड लगाकर काम चला दिया। सफाई की समस्या तक उनके कहने से दूर नहीं होती।

Posted By: Jagran

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