शैलजा त्यागी, जगाधरी

जिलास्तर पर प्रदूषण नियंत्रित करने की दिशा में बोर्ड ने पहल कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आला अधिकारियों ने जिलास्तर पर कार्यालय खोलने की अधिसूचना जारी करने के साथ ही अधिकारियों की भी नियुक्ति कर दी है। बोर्ड के अधिकारी अब जहां प्रदूषण नियंत्रण करने की दिशा में कारगर कदम उठा सकेंगे, जबकि अब उद्योगपतियों को नई फैक्ट्री लगाने या फिर पुरानी को सुचारु रूप से चलाने की अनुमति भी जिला स्तर पर मिल जाएगी।

बोर्ड के चेयरमैन अशोक खेतरपाल ने 21 नवंबर को पत्र के जरिये अधिसूचना जारी की। साथ ही उन्होंने जल्द से जल्द कार्यालय खोलने के आदेश दिए। जब तक कार्यालय नहीं खोला जाता, तब तक वैकल्पिक तौर पर व्यवस्था की गई है। बोर्ड के आधा अधिकारियों के मुताबिक इस पहल से प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में जहां कारगर कदम उठाए जा सकेंगे, जबकि समस्याओं का निपटारा भी जल्द हो पाएगा।

उद्योगपतियों को मिला सबसे ज्यादा फायदा

जिलास्तर पर कार्यालय खोले जाने से सबसे ज्यादा फायदा उद्योगपतियों को मिला है। उद्योगपतियों को नॉन आब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी), कंसेंट टू ऑपरेट (उद्योग चलाने की अनुमति) तथा ऑथराइजेशन लेने या फिर अन्य कामों की सुविधा अब जिला स्तर पर ही मिल जाएगी। अभी तक उन्हें हर काम के लिए क्षेत्रीय कार्यालय का रुख करने पर मजबूर होना पड़ रहा था। इसके अलावा जल, वायु व ध्वनि प्रदूषण से संबंधित आने वाले शिकायतों का निपटारा भी जल्द हो पाएगा।

पहले यह थी स्थिति

बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश के 22 जिलों में 12 क्षेत्रीय कार्यालय खोले गए हैं। उसमें पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत, भिवानी, हिसार, गुड़गांव साउथ और नार्थ, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, धारूहेड़ व बहादुरगढ़ शामिल हैं। प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय के तहत दो से तीन जिले दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर यमुनानगर क्षेत्रीय कार्यालय के तहत यमुनानगर और करनाल जिले हैं। इन जिलों में जितनी भी औद्योगिक इकाइयां हैं, उनके प्रदूषण को नियंत्रित करने का जिम्मा क्षेत्रीय कार्यालय का है। करनाल के उद्योगपतियों को प्रदूषण बोर्ड से संबंधित कार्य के लिए यमुनानगर का रूख करना पड़ता है। वहीं करनाल की प्रदूषण संबंधी कंप्लेंड का निपटारा करने के लिहाज से अधिकारियों को वहां जाना पड़ता है।

यह होगा फायदा

किसी भी नई औद्योगिक इकाइयों को चालू करने के लिए उद्योगपति को बोर्ड से एनओसी, कंसेंट टू ऑपरेट, ऑथराइजेशन, ऑथराइजेशन अंडर बायोमेडिकल वेस्ट (हॉस्पिटल के लिए) की अनुमति लेनी अनिवार्य है। जिला स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय खुलने से उद्योगपति अब राहत की सांस ली है। इसके अलावा अधिकारियों को भी फायदा हुआ है। एमरजेंसी कंप्लेंड पर जाने के लिए अब अधिकारियों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा रोजमर्रा आने वाले शिकायतों का निपटारा भी समय पर किया जा सकेगा।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी एस. नारायणन का कहना है कि सरकार ने जिला स्तर पर कार्यालय खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। 21 नवंबर को इस बारे में लेटर जारी कर दिया गया है।

Posted By: Jagran

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