जागरण संवाददाता, यमुनानगर :

एनजीटी की सख्ती के बाद अधिकारी पश्चिमी यमुना नहर में गिर रहे नालों को डाइवर्ट करने में जुटे हुए हैं। इन नालों को इंटरमीडिएट ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए डिच ड्रेन में डाला जाएगा। इसके लिए एक आइटीपी (इंटरमीडिएट ट्रीटमेंट) बाडी माजरा में बनाया गया है। जबकि हमीदा हेड व वार्ड-19 में प्लांट बनाने की तैयारी है। बता दें कि जगाधरी से लेकर हमीदा हेड तक अलग-अलग 12 नाले नहर में गिर रहे थे। इनमें से छह नालों को डाइवर्ट कर दिया गया है। चार नालों को 30 मई तक डाइवर्ट करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा दो नालों को डाइवर्ट करने की प्लानिग की जा रही है।

पांच साल बाद कार्रवाई

नवंबर-2016 में सीएम मनोहर लाल ने इन नालों को डाइवर्ट करने के आदेश दिए थे। क्योंकि शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकल रहे ये नाले पश्चिमी यमुना नहर में गिर रहे हैं। मार्च-2019 में एनजीटी ने इस संदर्भ में नगर निगम, निगम सिचाई विभाग और जन स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी कर जल्द डाइवर्ट करने के निर्देश दिए थे। बाद में आइटीपी बनाकर डिच ड्रेन में नालों को डाइवर्ट करने की योजना बनी। ग्राम पंचायतों के नाले भी होंगे डाइवर्ट

दादुपुर, किशनपुरा माजरा, खारवन, फतेहगढ़, बूड़िया, दयालगढ़, अमादलपुर, नया गांव, परवालों, दड़वा माजरी व कांजनू गांव में नहर में गिर रहे नालों को भी डाइवर्ट किया जाएगा। आजाद नगर, मुंडा माजरा व खालसा कालेज एरिया से निकल रहे नालों को डाइवर्ट किया जा चुका है। इसलिए एनजीटी हुई सख्त

यमुना नहर में बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से जलीय जीवों का जीवन संकट में है। वहीं दूषित पानी भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है। केमिकल युक्त दूषित पानी से टाइफाइड, डायरिया जैसे जल जनित बीमारी हो जाती हैं। हैवी मेटल (इंडस्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी) से कैंसर, दिमाग, किडनी और फेफड़े से जुड़ी बीमारियों का डर होता है। एक भी नाला नहर में न गिरे यही है प्रयास

नगर निगम एरिया से 12 नाले पश्चिमी यमुना नहर में गिर रहे थे। इनमें से छह को डाइवर्ट किया जा चुका है, शेष पर काम चल रहा है। जल्दी ही इनको भी डाइवर्ट कर दिया जाएगा। हमारा प्रयास है कि नगर निगम एरिया से एक भी नाले का बहाव नहर में न हो।

विकास बाल्याण, एक्सइएन, नगर निगम।

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