राजेश कुमार, यमुनानगर

छेड़छाड़ के बाद समाज में होने वाली बदनामी से बचने के लिए माता-पिता अपनी लाडली को बाल विवाह की भट्ठी में झोंक रहे हैं। पिछले 21 महीने में 24 लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले करने की कोशिश की गई। माता-पिता इसमें कामयाब भी हो जाते लेकिन जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी की टीम ने समय रहते मौके पर पहुंच कर बेटियों को बालिका वधू बनने से बचा लिया। विभाग द्वारा की गई काउंसि¨लग में सामने आया कि 18 साल से पहले उन्हीं लड़कियों की शादी की जा रही थी जिनके साथ छेड़छाड़ हुई थी या फिर उन्हें कोई युवक शादी का झांसा देकर बहला फुसला कर अपने साथ ले जा चुका था।

बदनामी के डर से कर रहे 18 से पहले शादी

जिन लड़कियों की लोगों ने 18 साल से पहले शादी की कोशिश की गई उनकी जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय के अधिकारियों द्वारा काउंसि¨लग की गई। ज्यादातर लोगों का कहना है कि जिस बेटी को उन्होंने जैसे-तैसे स्कूल में पढ़ाया, अब आते-जाते उनके साथ छेड़छाड़ की घटनाएं होने लगी हैं। बेटी बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। इसलिए कई मामलों में युवक उन्हें शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा भी ले गए। इससे समाज में पूरे परिवार की बदनामी होती है। यदि लड़की घर से किसी के साथ चली जाए तो समाज के लोग खिल्ली उड़ाते हैं। ऐसी बदनामी से अच्छा तो यही है कि कम उम्र में ही शादी कर दी जाए। शादी के बाद बेटी अपनी ससुराल चली जाए इससे बड़ी कोई बात नहीं है। क्योंकि छेड़छाड़ की शिकार लड़कियों की शादी करना भी मुश्किल हो जाता है। कोई भी लड़का उनसे शादी करने से हिचकिचाता है। बस यही कारण है कि माता-पिता अपनी बदनामी के डर से नाबालिग बेटियों की शादी कर रहे हैं।

शहर की बजाय गांवों में ज्यादा शादियां

बाल विवाह शहर की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हो रहे हैं। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी जागरूकता का अभाव है। दूसरा गांव में यदि किसी परिवार के साथ कुछ होता है तो पूरे गांव में खबर आग की तरह फैल जाती है। जबकि शहर में ऐसा नहीं है। शहर के लोग केवल अपने परिवार तक ही सीमित हैं। इससे पता चलता है कि गांवों में अब भी जागरूकता का अभाव है। वहां पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है।

अब पोक्सो एक्ट के तहत भी दर्ज होगा केस

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसला सुनाया है जिसमें कहा गया है कि नाबालिग लड़की से शादी करने वाले पर पोक्सो एक्ट के तहत भी केस दर्ज होगा। बाल विवाह करने पर एक साल की सजा व दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। जबकि पोक्सो एक्ट लगने पर सजा सात साल से उम्रकैद तक हो सकती है। इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान है। इसी साल उत्तराखंड के अल्मोड़ा में बाल विवाह करने वाले लड़की के पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास व दूल्हे समेत छह लोगों की 10 साल की सजा भी सुनाई थी।

लोगों को जागरूक करने की जरूरत : कौर

जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी अर¨वद्रजीत कौर का कहना है कि शादी के लिए लड़की की उम्र 18 व लड़की की 21 वर्ष तय की गई है। इससे पहले दोनों की शादी करना कानून अपराध है। यदि कहीं से बाल विवाह की सूचना आती है तो तुरंत मौके पर जाकर शादी रुकवाते हैं। ऐसा करने वाले पर एफआईआर दर्ज कराने का भी प्रावधान है। लोगों को बाल विवाह के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। हमारी टीम जब ऐसी जगह जाती हैं तो उन्हें बाल विवाह को लेकर पूरी जानकारी दी जाती है।

वर्ष 2016 में रुकवाई गई नाबालिग लड़कियों की शादी

20 फरवरी 2016 फर्कपुर

25 फरवरी आदर्श नगर कैंप

9 मार्च शेखु माजरा

11 मार्च जो¨गद्र नगर

22 मार्च अमर विहार जगाधरी

15 अप्रैल बूड़िया

23 अप्रैल सुघ माजरी

29 जून कुटीपुर

10 जुलाई माली माजरा

8 अक्टूबर दुर्गा गार्डन

16 दिसंबर छोटी लाइन।

वर्ष 2017 में रूकवाई गई नाबालिग लड़कियों की शादी :

16 जनवरी 2017 गुलाब नगर

24 अप्रैल तेजली गेट

6 जून शांति कालोनी

12 जून रूप नगर कालोनी

19 जून अर्जुन नगर

27 जून पाबनी खुर्द

6 जुलाई कुटीपुर

6 अगस्त दमोपुरा

6 अगस्त द्वारिकापुरी

16 अगस्त मखौर

8 अगस्त फतेहगढ़

23 अक्टूबर बलवंत राय कालोनी

27 अक्टूबर बसंत विहार

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