पोपीन पंवार, यमुनानगर : 16 वर्ष के बाद 2018 में प्लाइवुड इंडस्ट्री के लाइसेंस ओपन हुए। उम्मीद थी कि ये कारोबार चरम पर जाएगा। लेकिन इसके विपरीत हुआ। इस कारोबार में जिले ने जो चमक बनाई थी, वह घटने लगी है। लोकसभा चुनाव के दिनों में बिक्री कम और पमेंट में आ रही दिक्कतों के कारण फैक्टरियां बंद हो रही है। एडवांस देकर किराए पर फैक्टरी चलाने वाले भी चले गए। 24 घंटे चलने वाली फैक्टरियों का पहले समय कम हुआ, तब भी बात नहीं बनी तो अब सप्ताह में दो दिन बंद रखने का फैसला व्यापारियों ने लिया है। जिले का हर तीसरा व्यक्ति इस कारोबार से जुड़ा है। बोर्ड के काम में देशभर में 60 हजार से ज्यादा छोटे बड़े दुकानदार इस व्यापार से घर चलाते हैं। समय रहते सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो ये कारोबार यहां पर दम तोड़ देगा। इसका नुकसान प्रदेश

को होगा। क्योंकि जीएसटी से पहले ये इंडस्ट्री 110 करोड़ का राजस्व देते थी, अब 14 सौ करोड़ के करीब राजस्व जा रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि चुनावी दिनों में बोर्ड की मांग नहीं है। रियेल स्टेट में भी यहीं हाल है। माल की पेमेंट समय पर नहीं आ रही है। लंबा उधार चलता है। तैयार माल स्टॉक में पड़ा है। लेबर और अन्य खर्च नियमित चल रहे हैं। मार्केट फीस लगने पर लक्कड़ महंगा हो गया। यहां बोर्ड की कीमत बढ़ने से व्यापार दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो रहा है।

एक दशक से बंद इंडस्ट्री के लाइसेंस वर्तमान सरकार ने खोल दिए। देशभर में इसको एग्रो बेस इंडस्ट्री घोषित कर दिया। तर्क यह भी दिया जा रहा है कि नई इंडस्ट्री की संख्या बढ़ गई, जिस कारण कच्चे माल के दामों में इजाफा आ गया। बोर्ड के रेट में कोई बदलाव नहीं आया। इन सब कारणों से व्यापारियों को घाटा हो रहा है। पहले जहां डबल शिफ्ट में काम होता था। व्यापार बचाने के लिए इंडस्ट्री चलाने का समय घटाया। 24 से 18 और 18 से 12 घंटे तक काम किया। इससे भी नुकसान पूरा नहीं हुआ तो व्यापारियों ने सप्ताह में पांच दिन फैक्टरी चलाने का फैसला लिया है। ईधन भी 300 के पार

दो साल पहले पापुलर के रेट में भारी गिरावट आ गई थी। उन दिनों ओवर पापुलर 300 से 400 रुपये प्रति क्विटल बिक रहा था। रेट को बढ़ाने के लिए सभी किसान संगठन एक बैनर के तले एकत्रित हुए। 50 दिन तक वर्ष 2016 में आंदोलन चलाया। जब आंदोलन उग्र हो गया तो स्पीकर कंवरपाल व सिटी विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को किसानों के बीच आना पड़ा। आंदोलन खत्म कराया। इसके बाद भी रेट नहीं बढ़े। तब किसान संगठनों ने पापुलर की फसल को खत्म करने के लिए अभियान चलाया। किसानों ने कहा कि पापुलर नहीं गन्ने की फसल पर ध्यान दें, क्योंकि गन्ने और पापुलर के रेट समान थे। गन्ना एक व पापुलर पांच साल में तैयार होता है। किसानों ने पापुलर कम कर दिया। फैक्टरी की संख्या बढ़ने से डिमांड हो गई। किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर चौहान का कहना है कि आंदोलन के दौरान उन्होंने कह दिया था कि आने वाले समय में फैक्टरियों को पापुलर नहीं मिलेगा। जिस कारण फैक्टरी बंद होंगी। वही स्थिति अब आ गई है। भाजपा के बड़े नेता ने मंच से घोषणा कि थी कि संयम बरते। पापुलर मिर्च के भाव में बिकेगा। अभी नई फैक्टरियों में से चंद ही शुरू हुई हैं। ये हालात हो गए हैं। संकट में है व्यापार : चौपाल

मैन्यूफैक्चर एसोसिएशन जगाधरी के प्रधान सतीश चौपाल व अन्य सदस्यों का कहना है कि प्लाइवुड व्यापारी घाटे में चल रहे हैं। इस घाटे को कम करने के लिए जगाधरी के व्यापारियों ने सप्ताह में पांच दिन प्लाइवुड चलाने का निर्णय लिया है। बोर्ड की डिमांड न होना व कच्चे माल के दाम बढ़ने व लकड़ी उपलब्ध न होने से दिक्कत आई है। इनकी मांग है इंडस्ट्री को बचाने के लिए मार्केट फीस हटाई जाए। पहले से ही व्यापारी जीएसटी का पूरा टैक्स भर रहे हैं। डबल टैक्स नहीं होना चाहिए। जिले में 250 नई इंडस्ट्री लगी

प्रदेश में वुड बेस इंडस्ट्री सबसे ज्यादा यमुनानगर जिले में 1300 इकाइयां ( बोर्ड यूनिट, पीलिग, आरा चीपर ) चल रही है। इनमें हर रोज ढाई लाख क्विटल कच्चे माल की खपत है। राज्य में 15 सौ के करीब व्यापारियों को नई इंडस्ट्री की अनुमति मिली। जिसमें से 350 नई इंडस्ट्री जिले में स्थापित हो रही है। यहां पर आठ सौ से ज्यादा वुड बेस इंडस्ट्री लगेगी। 250 व्यापारियों ने इंडस्ट्री चलाने की तैयारी कर ली है। जिले में बोर्ड की 450 यूनिट है। अब सप्ताह में लोड होती हैं 300 गाड़ियां

यमुनानगर जगाधरी से प्रतिदिन 300 से ज्यादा गाडिय़ां मुंबई, गुजरात, पंजाब, यूपी, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में बोर्ड जाता है। अब एक सप्ताह में 300 गाड़ी लोड होती हैं।

Posted By: Jagran

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