यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 10, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एनजीटी के आदेशों की नहीं परवाह, यमुना नहर को प्रदूषित कर रहा केमिकल युक्त पानी
औद्योगिक इकाइयों से निकल रहा केमिकल युक्त पानी व सीवरेज का बहाव सीधे यमुना में गिर रहा है। हालांकि नवंबर- ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, यमुनानगर :
औद्योगिक इकाइयों से निकल रहा केमिकल युक्त पानी व सीवरेज का बहाव सीधे यमुना में गिर रहा है। हालांकि नवंबर- 2016 में मुख्यमंत्री इन नालों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने की योजना की घोषणा कर चुके हैं। बावजूद इसके आज तक योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। हमीदा कालोनी व अन्य क्षेत्रों से कई नाले नहर में गिर रहे हैं। नाले का पानी नहर में गिरते हुए पूरे के पूरे नहर के पानी की रंग ही बदल देता है। यहां पर नाले का गंदा पानी पूरी नहर के पानी को तेजाबी पानी के रूप में बदल देता है।
बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से भी नालों का बहाव रोकने के आदेश दिए जा चुके हैं। भू जल को भी कर रहा प्रदूषित
पश्चिमी यमुना नहर में गिरता दूषित पानी सिर्फ नहर के पानी को ही प्रदूषित नहीं कर रहा है, इससे भूजल भी प्रदूषित हो रहा है। आसपास के इलाके में खारा व प्रदूषित पानी निकलने का सबसे बड़ा कारण यह भी है। विशेषज्ञों की माने तो नहर में जब भी पानी कम हो जाता है तो नहर की घाटी में नालों का प्रदूषित पानी बहता है। उधर, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकल रहा जल शुद्ध होगा, इसकी भी गारंटी नहीं है। क्योंकि यमुना शुद्धिकरण के लिए बनाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से ही ट्रीट होकर निकले पानी के सैंपल पूर्व में फेल भी आ चुके हैं। आस्था होती आहत
केमिकल युक्त दूषित पानी के नहर में गिरने से श्रद्धालुओं की आस्था आहत होती है। साथ ही जलीय जीवों का जीवन संकट में है। भूजल प्रदूषित हो रहा है। छठ पर्व के मद्देनजर भी इन नालों के बहाव को रोकने के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई है। केमिकल युक्त दूषित पानी से टाइफाइड, डायरिया जैसे जल जनित बीमारी हो जाती हैं। हैवी मेटल (इंडस्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी) से कैंसर, दिमाग का विकसित नहीं होना, किडनी फेल होना, फेफड़े सहित अन्य बीमारी हो जाती है। यमुनानगर-जगाधरी शहर के अलावा आसपास के गांवों से भी गंदे पानी की निकासी के नाले नहर में गिर रहे हैं। शहरी एरिया से निकल रहे नालों को डाइवर्ट कर एसटीपी तक ले जाने की योजना है।
