जागरण संवाददाता, यमुनानगर :

स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। सिविल अस्पताल से लेकर देहात तक के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टर नहीं होने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ऐसा लगता है कि डॉक्टरों के नहीं होने से स्वास्थ्य सेवाएं भी बीमार हो गई हैं। इस कारण आयुष्मान के तहत अस्पताल में दाखिल मरीजों को भी सही इलाज नहीं मिल रहा। उन्हें दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। अस्पताल में मौजूद डॉक्टर भी कागजी कार्यो में उलझे रहते हैं। इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। जिले की बात करें तो 141 डॉक्टरों की जरूरत है, लेकिन 62 डॉक्टर ही विभाग के पास हैं। इन पर भी सीएचसी और पीएचसी का चार्ज हैं। इसके अलावा 542 एनएचएम कर्मचारी हैं। उनमें से भी 175 हड़ताल पर हैं। यह स्थिति स्टाफ की :

पद - पद - खाली

सिविल सर्जन - एक - 0

डिप्टी सिविल सर्जन - 8 - 7

प्रिसिपल एमओ यमुनानगर - 1 - 0

डिप्टी एमओ यमुनानगर- 2 - 1

एसएमओ यमुनानगर - 5 - 2

एसएमओ जगाधरी - 1 - 0

एसएमओ सरस्वतीनगर- 1 - 1

एसएमओ नाहरपुर - 1 - 0

एसएमओ खिजराबाद - 1 - 1

एसएमओ रादौर - 1 - 0

एसएमओ साढौरा - 1 - 0

एसएमओ बिलासपुर - 1 - 1

एसएमओ छछरौली - 1 - 1

एमओ यमुनानगर - 55 - 38

एमओ जगाधरी - 8 - 0

एमओ सरस्वतीनगर - 7 - 4

एमओ भंभौल - 2 - 1

एमओ अरनौली - 2 - 0

एमओ नाहरपुर - 7 - 5

एमओ कलानौर - 2 - 0

एमओ साबापुर - 2 - 0

एमओ बूड़िया - 2 - 0

एमओ रादौर - 7- 5

एमओ अलाहर- 2- 2

एमओ अंटावा - 2- 0

एमओ छछरौली- 7- 2

एमओ खिजराबाद- 7- 0

एमओ खारवन- 2- 0

एमओ कोट मुस्तरकां- 2 - 1

एमओ खदरी- 2 - 2

एमओ साढौरा - 7- 3

एमओ रसूलपुर-2 - 2

एमओ बिलासपुर- 7- 5

एमओ मुगलवाली- 2 -1

एमओ हैबतपुर- 2 - 1

एमओ रणजीतपुर - 2- 2 एकमात्र फिजिशियन डॉ. चहल भी तबदील

जिले में एकमात्र फिजिशियन डॉ. अरविद चहल का भी तबादला हो गया है। सिविल अस्पताल में अधिकतर मरीज वायरल, बुखार और जुकाम के आते हैं। उनका तबादला होने से अब मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। इसके अलावा कान, नाक और स्त्री रोग विशेषज्ञ की पहले ही कमी है। जो डॉक्टर हैं। उन पर ऑपरेशन का भी जिम्मा है। इसके लिए दिन निर्धारित हैं। ऐसे में मरीजों को ऑपरेशन के दिन डॉक्टर का घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। 1300 ओपीडी हर रोज

सिविल अस्पताल यमुनानगर की बात करें तो यहां पर हर रोज 1100 से 1300 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। इसी तरह से जगाधरी में भी हर रोज एक हजार की ओपीडी होती है। हालांकि इनमें गर्भवती महिलाएं अधिक होती हैं। डॉक्टरों के न होने से मरीजों को दिक्कत होती है। यदि एक भी डॉक्टर छुट्टी पर हो तो मरीजों को दिक्कत होती है। उन्हें अगले दिन आना पड़ता है या फिर दूसरी जगह इलाज के लिए जाना पड़ता है। एक साल के मरीजों का आंकड़ा

जनवरी से लेकर दिसंबर 2018 में 405213 मरीजों की ओपीडी सिविल अस्पताल यमुनानगर में हुई, जबकि जगाधरी में 189653 मरीजों की ओपीडी हुई। जिले की बात करें, तो कुल 1205142 मरीजों की ओपीडी हुई। कोट्स :

यह बिल्कुल सही है। हमारे पास डॉक्टरों की कमी है। इसकी वजह से दिक्कत झेलनी पड़ती है। सबसे बड़ी परेशानी किसी डॉक्टर के छुट्टी पर जाने की वजह से होती है। इस बारे में लगातार आलाधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर तरीके से चलाया जा सके।

-डॉ. कुलदीप, सिविल सर्जन।

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