जागरण संवाददाता, यमुनानगर : ब्लॉक समिति बिलासपुर के चेयरमैन महीपाल संधाय के साथ 18 सदस्यों का तीन माह से चल रहा विवाद मंगलवार को खत्म हो गया। सदस्य राजेंद्र कुमार व सतीश कुमार ने कोर्ट में बयान देने से मना कर दिया। कुछ सदस्यों ने फोन कर चेयरमैन महीपाल को रेस्ट हाउस में बुला लिया, जहां पर सदस्यों ने उनसे हाथ मिला लिया। साथ ही ये भी कहा कि वे कोई कोर्ट केस नहीं चाहते और न ही उनके मन में कोई शिकवा है। इसके बाद सभी सदस्य अपने घर चले गए।

राजेंद्र को घर से लाए थे सदस्य

वार्ड 5 से ब्लॉक समिति सदस्य राजेंद्र कुमार को मंगलवार को कोर्ट में बयान देने थे। इसलिए 14 से अधिक सदस्य उन्हें लेने के लिए उनके घर गए। राजेंद्र थाने में भी पहुंचे। एक के बाद एक यहां पर अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सभी 18 सदस्य एकजुट हो गए। इसी दौरान कुछ सदस्यों ने राजेंद्र को थोड़ी देर के लिए कोर्ट में बयान देने से मना कर दिया। वे राजेंद्र को लेकर रेस्ट हाउस में चले गए। काफी देर तक सदस्य रेस्ट हाउस तो कभी थाने के चक्कर काटते रहे। करीब डेढ़ बजे कुछ सदस्य कहने लगे कि उन्हें चेयरमैन के खिलाफ कोई केस नहीं करना है। इसलिए वे कोर्ट में बयान नहीं देंगे। महीपाल संधाय को भी सदस्यों ने रेस्ट हाउस में बुला लिया। जहां उनसे किसी तरह का गिला शिकवा नहीं होने की बात कही गई। सदस्य नहीं चाहते थे बयान दूं : राजेंद्र कुमार

रेस्ट हाउस में सभी 18 सदस्य एकत्रित हुए थे। वहां पर अन्य सदस्यों ने चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई कराने से मना कर दिया। जिस दिन मेरा अपहरण हुआ तब मेरे साथ वार्ड 18 से सदस्य सतीश कुमार था। सतीश ने जब बयान नहीं देने की बात कही तो मैं भी वहां से अपने घर आ गया। इसलिए मैंने अपना बयान नहीं दिया। थाने में कोई सदस्य नहीं आया : रामफल

थाना बिलासपुर प्रभारी रामफल ने बताया कि सदस्यों का चेयरमैन के साथ समझौता हुआ या नहीं इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इस बारे में कोई भी लिखित में थाने में देकर नहीं गया। राजेंद्र भी बयान देने लिए थाने में नहीं आया है। सदस्यों से कोई विवाद नहीं है : महीपाल

चेयरमैन महीपाल संधाय का कहना है कि मेरा किसी सदस्य से कोई विवाद नहीं है। रेस्ट हाउस में मीटिग हुई थी। सभी सदस्यों के साथ मिलकर विकास कार्यो में तेजी लाई जाएगी। सभी सदस्य साथ हैं। ये था मामला :

ब्लॉक समित बिलासपुर में कुल 26 सदस्य हैं। इनमें से 18 सदस्य चेयरमैन महीपाल संधाय व उपाध्यक्ष सविता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। चुनाव को लेकर कई बार सदस्य डीसी से भी मिले। अविश्वास प्रस्ताव पर 17 जनवरी को वोटिग होनी थी। लेकिन एक दिन पहले ही 16 जनवरी की शाम अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सदस्य राजेंद्र कुमार जब अपनी पत्नी व अन्य सदस्य सतीश कुमार के साथ बिलासपुर आ रहे थे तो रास्ते में राजेंद्र का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया था। उनकी पत्नी ने चेयरमैन के बेटे अभिषेक, दो अध्यापकों संधाय निवासी बबलू, मछरौली के यशपाल ढांडा तथा चौराही के मांगे राम व संधाय के हरपाल पर अपहरण का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। पर्याप्त बहुमत न होने के कारण 17 सदस्यों ने वोटिग में हिस्सा नहीं लिया। दोपहर को राजेंद्र को नेहरू पार्क के पास छोड़ दिया गया था।

Posted By: Jagran

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