जागरण संवाददाता, यमुनानगर : बस स्टैंड यमुनानगर पर इन दिनों अव्यवस्थाओं का आलम है। पार्किंग को बस स्टैंड परिसर तक बढ़ाकर संचालक ने कब्जा जमा लिया है। इसके चलते यहां निकलने की पर्याप्त जगह नहीं बची। बसों में रखे गए अधिकतर अग्निश्मन यंत्र ऐसे मिले जिनको समय पर दमकल से चेक नहीं कराया गया। अनदेखी के चलते इनकी डेट एक्सपायर हो गई। सफाई भी सही ढंग से नहीं का जा रही। परिसर में गंदगी पड़ी दिखाई दी। फटी सीटों पर बैठकर यात्रा करते यात्री

एक नहीं कई बसों की सीट चेक की गई। जो कि फटी हुई थी। इनके अंदर से गद्दे बाहर निकले हुए थे। बसों के अंदर सफाई तक नहीं थी। बस के नजदीक खड़े यात्री दिलशाद ने बताया कि वह दिल्ली जा रहा है। जिस बस में वह सफर करेगा। इसकी सीट तक ठीक नहीं है।

फतेहाबाद जाने वाली बस में अधिक भीड़ :

फतेहाबाद जाने वाली बस में यात्रियों की अधिक भीड़ दिखाई दी। आलम ये था कि पहले चढ़ने की होड़ में कई यात्री बस में चढ़ नहीं पाए। उनको दूसरी बस से सफर तय करना पड़ा। बस के अंदर घुसने तक जगह नहीं थी। सही नहीं मिले अग्निश्मन यंत्र

हरियाणा रोडवेज की बसों में सुरक्षा को देखते हुए अग्निशमन यंत्र लगाए जाते हैं, जिससे बस में आग लगने पर उस पर तुरंत काबू पाया जा सके। परंतु रोडवेज बसों में अग्निशमन यंत्र ही नहीं है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर संदेह उत्पन्न होता है। वहीं दूसरी ओर यात्रियों को बसों में पूरी सुविधा भी नहीं मिल पा रहा है। रोडवेज को जिन बसों की हालत ठीक है उनमें तो अग्निशमन यंत्र लगे हुए हैं, लेकिन अभी तक पुरानी बसों में आगजनी की घटना से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र नहीं है। शीशे भी जाम

रोडवेज की कई बसों में शीशे जाम पड़े हुए हैं। ऐसी बसों की संख्या भी कम नहीं हैं जिनकी छतों से बरसात होने पर पानी टपकता है। पानी से बचने के लिए यात्री इधर-उधर होते रहते हैं। बताया जा रहा है कि जब से सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों का ओवर टाइम बंद किया है तब से वे काम के प्रति गंभीर नहीं रहे। बसों में जानबूझ कर कोई न कोई खामी छोड़ी जा रही है। यात्री विकास ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र से आया है। जिस सीट पर वह बैठा था। वहां का शीशा तक नहीं खुला। संबंधित विभाग को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। बिना सीट बेल्ट चलते हैं चालक

रोडवेज कर्मचारी सीट बेल्ट भी नहीं लगा रहे। सीट बेल्ट केवल उन बसों में ही दिखाई देती है जो दिल्ली या अन्य प्रदेशों में जाती हैं। ये सीट बेल्ट भी तभी लगाई जाती है जब बस प्रदेश की सीमा से निकल कर दूसरे राज्य में प्रवेश कर रही हो। कई चालक बिना सीट बेल्ट के बस चलाते दिखाई दिए।

Posted By: Jagran

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