जागरण संवाददाता, यमुनानगर : जैविक पिता की पुष्टि के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे जठलाना निवासी नवनीत सिंह के मामले में वीरवार को सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने अब 11 दिसंबर की तारीख दी है। 30 वर्षीय नवनीत ने मध्यप्रदेश की लड़की से 2013 में लव मैरिज की थी। इसका उसके (नवनीत) के माता-पिता ने विरोध किया और यह कहते हुए घर से निकाल दिया था कि वह उसका बेटा नहीं है। उनका चचेरा भाई उसका पिता है। इसके बाद से ही वह कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा है।

कोर्ट ने जैविक पिता को डीएनए टेस्ट कराने के आदेश दिए थे। इस मामले में वह हाईकोर्ट में गए, जहां से उनकी याचिका खारिज हो गई। फैमिली कोर्ट जगाधरी में इस केस की सुनवाई चल रही है। वादी के वकील रमनदीप खजूरी ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण अब 11 दिसंबर की तारीख लगी है।

नवनीत का कहना है कि उसकी मां ने बताया कि 31 साल पहले उसके पिता परिवार के एक सदस्य को लेकर अस्पताल में गए थे। तभी पीछे से उसके पिता के चचेरे भाई ने जबरन नीलम के साथ संबंध बना लिए, जिससे उसका जन्म हुआ। वह बैंक मैनेजर हैं। वह नवनीत को अपना बेटा मानने से इंकार कर चुका है। इसके बाद से ही मामला कोर्ट में चल रहा है। जन्म वाले दिन ही आया था नौकरी का लेटर

पीड़ित का कहना है कि उसके पिता बचपन में अपने चाचा के पास रहते थे। उन्होंने ही उनकी शादी करवाई थी। दंपती उनका ही काम किया करते थे। जब सात अक्टूबर 1990 को उसका जन्म हुआ तो उनके जैविक पिता को नौकरी का लेटर मिला। तब उसने उसकी माता से कहा था कि यह बेटा किस्मत वाला है। वह इसकी अच्छी परवरिश करेंगे। लेकिन वह अब उसको भूल गया। आरोप है कि केस उठाने के लिए उस पर दबाव भी बनाया जा रहा है। कोर्ट में दिए बयानों में उसकी मां भी जैविक पिता का नाम बता चुकी है।

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