किसान का बेटा बना भारतीय कबड्डी टीम का कप्तान, जानिए कैसे अभावों से लड़कर सुनील ने पाया खास मुकाम
छोटे किसान के बेटे सुनील मलिक आगामी एशियाई खेलों में भारतीय कबड्डी टीम की कप्तानी करेंगे। सीमित संसाधनों के बावजूद, ...और पढ़ें

किसान के बेटे सुनील मलिक बने भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान।
HighLights
छोटे किसान के बेटे सुनील मलिक बने भारतीय कबड्डी कप्तान।
सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम।
एशियाई खेलों में भारतीय टीम की कमान संभालेंगे सुनील।
जागरण संवाददाता, गोहाना। दो एकड़ से भी कम जमीन वाले किसान परिवार का बेटा अब भारतीय कबड्डी टीम का कप्तान बनकर देश का नेतृत्व करने जा रहा है। गांव भैंसवाल कलां के सुनील मलिक ने सीमित संसाधनों और जीवन की चुनौतियों को हराकर यह बड़ा मुकाम हासिल किया है।
परिवार के संघर्ष और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर गांव की माटी से शुरू हुआ सुनील का सफर भारतीय टीम की कप्तानी तक पहुंच गया है। सुनील आगामी एशियाई खेलों में भारतीय कबड्डी टीम की कमान संभालेंगे।
सुनील के पिता उमेद सिंह छोटे किसान थे और उनके पास दो एकड़ से भी कम जमीन थी। परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे के खेल के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ सुनील का सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
सुनील अपने बड़े भाई विजेंद्र मलिक को खेल के सफर में अपना मार्गदर्शक मानते हैं। विजेंद्र स्वयं कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं और खेल के आधार पर सीआइएसएफ में नौकरी कर रहे हैं। परिवार के सहयोग और अपने मजबूत इरादों के सहारे सुनील लगातार आगे बढ़ते गए।
गांव से शुरू किया था कबड्डी का सफर
सुनील ने बचपन में गांव की माटी से कबड्डी का सफर शुरू किया था। वे गांव की बलिदानी जीत सिंह कबड्डी अकादमी में भी अभ्यास करते थे। शुरुआत में ही उनके खेल को देखकर प्रशिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था। डिफेंडर के रूप में खेलने वाले सुनील की पकड़ उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
मैदान में एक बार प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी उनकी गिरफ्त में आ जाए तो उसका बच निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्हें अपनी शांत कप्तानी, बेहतरीन डिफेंस और रणनीतिक फैसलों के लिए जाना जाता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर सुनील ने पहले राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर प्रो-कबड्डी व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी धाक जमाई। वह पूर्वोत्तर रेलवे और भारतीय रेलवे कबड्डी टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे में वह प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में अवर लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। अब भारतीय कबड्डी टीम की कप्तानी मिलने के बाद गांव भैंसवाल कलां सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि छोटे किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कप्तानी तक पहुंचना गांव के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है।
सीएम के ओएसडी पहुंचे गांव, पगड़ी पहनाकर किया सम्मान
सुनील के भारतीय कबड्डी टीम का कप्तान बनने पर मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं प्रसिद्ध कलाकार गजेंद्र फौगाट मंगलवार को उनके पैतृक गांव भैंसवाल कलां पहुंचे। उन्होंने सुनील को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने सुनील की माता गुड्डी देवी को शाल ओढ़ाकर सम्मान दिया और उनका आशीर्वाद लिया।
फौगाट ने कहा कि हरियाणा की मिट्टी ने देश को हमेशा बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर खेलों की और बढ़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर सुनील की माता गुड्डी देवी, भाई विजेंद्र व सुमित, गुरु भूपेंद्र मलिक, सरपंच संदीप मलिक, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी प्रशिक्षक सुशील शास्त्री, संजय मलिक, दिनेश शर्मा रहे।
खेल उपलब्धियां
-11 साल की उम्र में कबड्डी खेलना शुरू किया
-वर्ष 2015 और 2016 में जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर बनाई पहचान
-प्रो कबड्डी लीग में यू मुंबा, जयपुर पिंक पैंथर्स टीमों के लिए खेल चुके हैं।
-प्रो कबड्डी लीग में सबसे सफल कप्तान बन चुके हैं
-वर्ष 2022-23 के एशियाई खेलों एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे
