कौन है भारतीय कबड्डी टीम का नया कप्तान? 11 की उम्र में शुरू किया खेल, हरियाणा के लाल को एशियन गेम्स की कमान
सोनीपत के भैंसवाल कलां गांव के सुनील कुमार को भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का नया कप्तान नियुक्त किया गया है। ...और पढ़ें

सुनील मलिक बने भारतीय कबड्डी टीम के नए कप्तान। फोटो: इंटरनेट
HighLights
सोनीपत के सुनील कुमार भारतीय कबड्डी टीम के नए कप्तान
11 साल की उम्र से शुरू किया कबड्डी का सफर
प्रो कबड्डी लीग और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता
डिजिटल डेस्क, सोनीपत। कबड्डी के मैदान पर एक पल की चूक पूरी टीम पर भारी पड़ सकती है, लेकिन सुनील कुमार अपने शांत दिमाग, मजबूत डिफेंस और सही समय पर फैसले लेने के लिए पहचाने जाते हैं।
हरियाणा के सोनीपत के एक किसान परिवार से निकलकर प्रो कबड्डी लीग और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले सुनील अब भारतीय पुरुष कबड्डी टीम की कमान संभालेंगे।
भैंसवाल कलां की मिट्टी से निकला नया कप्तान
भारतीय कबड्डी टीम के नवनियुक्त कप्तान सुनील कुमार का जन्म 12 मई 1997 को हरियाणा के सोनीपत जिले के भैंसवाल कलां गांव में हुआ था। वह एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता विजेंद्र मलिक अब इस दुनिया में नहीं हैं।
भैंसवाल कलां गांव को पहलवानों और कबड्डी खिलाड़ियों की नर्सरी माना जाता है। सुनील के चचेरे भाई परवेश भैंसवाल भी भारतीय कबड्डी के स्टार डिफेंडर हैं। परिवार और गांव के खिलाड़ियों को बचपन से कबड्डी खेलते देखकर सुनील की भी इस खेल में रुचि बढ़ी।

11 साल की उम्र में चुना कबड्डी का रास्ता
सुनील कुमार ने महज 11 साल की उम्र में कबड्डी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था। चचेरे भाइयों और गांव के सीनियर खिलाड़ियों को मैट और मिट्टी पर खेलते देखकर उनका खेल के प्रति जुनून बढ़ता गया।
उनके बड़े भाई उन्हें रोज प्रैक्टिस के लिए मैदान तक ले जाते थे। धीरे-धीरे सुनील पूरी तरह से कबड्डी के खेल में रम गए।
सुबह 4 बजे मैदान में, साल में सिर्फ 2 छुट्टी
सुनील के गांव के स्थानीय कोच मलिक अनुशासन के काफी पक्के बताए जाते हैं। सुनील रोज सुबह 4 बजे उठकर अतिरिक्त अभ्यास के लिए मैदान पहुंच जाते थे।
उनके प्रशिक्षण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोच साल में केवल दो दिन होली और दीपावली की छुट्टी देते थे। इसी कड़े अभ्यास ने सुनील के डिफेंस को मजबूत बनाया।
उनकी 'राइट कवर' पोजीशन और 'चेन टैकल' की तकनीक धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

स्थानीय टूर्नामेंट से पहुंचे SAI अहमदाबाद
जूनियर स्तर और यूनिवर्सिटी गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद एक स्थानीय टूर्नामेंट के दौरान जाने-माने कबड्डी कोच जयवीर शर्मा की नजर सुनील कुमार पर पड़ी। वह उनके डिफेंस से प्रभावित हुए।
कोच जयवीर शर्मा की सिफारिश पर सुनील को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अहमदाबाद सेंटर में शामिल किया गया। यहां उन्हें आधुनिक मैट, सही डायट और प्रोफेशनल कोचों का मार्गदर्शन मिला, जिसने उनके खेल को नई दिशा दी।
जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के बाद PKL में एंट्री
SAI सेंटर में ट्रेनिंग के दौरान सुनील कुमार ने 2015 और 2016 में लगातार जूनियर नेशनल चैंपियनशिप जीती। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने प्रो कबड्डी लीग की टीमों का ध्यान खींचा।
साल 2016 में पटना पाइरेट्स ने उन्हें PKL सीजन 4 के लिए अपनी टीम में शामिल किया। यहीं से उनके प्रोफेशनल कबड्डी करियर की शुरुआत हुई।
परवेश के साथ बनी खतरनाक डिफेंस जोड़ी
PKL सीजन 5 में गुजरात फॉर्च्यून जायंट्स ने सुनील कुमार और उनके चचेरे भाई परवेश भैंसवाल को टीम में शामिल किया। दोनों ने मिलकर डिफेंस में मजबूत जोड़ी बनाई।
इसी दौरान सुनील को गुजरात की कप्तानी भी मिली। PKL सीजन 6 और 7 में भी उन्होंने टीम की कमान संभाली। उनके नेतृत्व ने उन्हें केवल एक डिफेंडर नहीं, बल्कि एक समझदार कप्तान के रूप में भी स्थापित किया।
जयपुर की कप्तानी और सीजन 9 का खिताब
PKL सीजन 9 में जयपुर पिंक पैंथर्स ने सुनील कुमार को अपना कप्तान नियुक्त किया। सुनील की कप्तानी में टीम ने खिताब जीता। इस सीजन में उन्होंने डिफेंस में 64 टैकल प्वाइंट हासिल किए। इसके बाद वह यू मुंबा से जुड़े और टीम की कमान भी संभाली।
एशियन गेम्स में गोल्ड, अब भारत की कमान
सुनील कुमार भारतीय राष्ट्रीय टीम का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2019 साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता।
2022 एशियन गेम्स, जो 2023 में आयोजित हुए, में वह भारतीय कबड्डी टीम का हिस्सा थे। भारतीय टीम ने फाइनल में ईरान को हराकर गोल्ड मेडल जीता। सुनील टीम के उपकप्तान भी रहे और इस जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब अगस्त 2026 में भारतीय एमेच्योर कबड्डी महासंघ (AKFI) ने उन्हें आगामी एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का नया कप्तान घोषित किया है।
रेलवे की नौकरी और कबड्डी का जुनून
सुनील कुमार पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में अवर लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी के साथ वह कबड्डी में भी लगातार सक्रिय हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेलवे का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
अब उनके सामने भारतीय टीम को कप्तान के रूप में मजबूत नेतृत्व देने की जिम्मेदारी होगी।

मैदान में साथ रही परवेश-सुनील की जोड़ी
सुनील कुमार और उनके चचेरे भाई परवेश भैंसवाल का रिश्ता केवल कबड्डी तक सीमित नहीं है। दोनों के घर गांव में आमने-सामने हैं। दोनों ने बचपन साथ बिताया, एक साथ कबड्डी सीखी और एक ही SAI सेंटर में ट्रेनिंग ली।
प्रो कबड्डी लीग में भी दोनों लंबे समय तक एक ही टीम गुजरात जायंट्स के लिए खेले। उनके करीबी बताते हैं कि दोनों असल जिंदगी में सगे भाइयों से भी बढ़कर हैं।
एक नजर में सुनील मलिक
- जन्म: 12 मई 1997
- जन्मस्थान: भैंसवाल कलां, सोनीपत, हरियाणा
- खेल: कबड्डी
- पोजीशन: डिफेंडर / राइट कवर
- खासियत: मजबूत डिफेंस, टैकल और चेन टैकल
- प्रशिक्षण: SAI अहमदाबाद सेंटर
- पहली PKL टीम: पटना पाइरेट्स
- PKL टीमें: पटना पाइरेट्स, गुजरात जायंट्स, जयपुर पिंक पैंथर्स, यू मुंबा
- PKL उपलब्धि: जयपुर पिंक पैंथर्स के कप्तान के रूप में सीजन 9 का खिताब
- 2019: साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक
- एशियन गेम्स: 2022 एशियन गेम्स में भारत के साथ स्वर्ण पदक
- वर्तमान भूमिका: भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के कप्तान
- नौकरी: भारतीय रेलवे
गांव के मैदान से भारतीय टीम की कमान तक
सुनील कुमार की कहानी सुबह 4 बजे शुरू होने वाली प्रैक्टिस, साल भर में सिर्फ दो दिन की छुट्टी और लगातार मेहनत की कहानी है। गांव की मिट्टी पर कबड्डी खेलने वाला बच्चा आज प्रो कबड्डी लीग में कई टीमों की कप्तानी कर चुका है और अब भारतीय टीम की कमान संभालने के लिए तैयार है।
मजबूत डिफेंस के साथ-साथ शांत दिमाग और कप्तानी की समझ ही सुनील कुमार को मैदान पर अलग पहचान देती है। आगामी एशियन गेम्स में अब उनके सामने भारत को कप्तान के तौर पर नेतृत्व देने की बड़ी चुनौती होगी।
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