3 दिन की बेटी का तोहफा, पिता बनते ही पैरा एथलीट अशोक की किस्मत चमकी; Asian Games में जीता सिल्वर मेडल
पैरा पावरलिफ्टर अशोक मलिक ने जापान में एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीता। उनकी पत्नी ने तीन दिन पहले ...और पढ़ें

बेटी के जन्म लेते ही पैरा एथलीट ने एशियन गेम्स में जीता पदक।
परमजीत सिंह, गोहाना। घर में बेटी ने आंखें खोलीं तो हजारों किलोमीटर दूर जापान में पिता अशोक मलिक ने देश के लिए रजत पदक जीत लिया। परिवार में नन्हीं परी के आने की खुशियां थीं और जापान में अशोक देश का नाम रोशन करने के लिए दमखम दिखा रहे थे।
पत्नी गीतिका ने तीन दिन पहले बेटी को जन्म दिया था। इसी दौरान अशोक ने एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीतकर परिवार की खुशियां दोगुनी कर दीं।
अशोक अभी तक बेटी का चेहरा ठीक से नहीं देख पाए हैं, लेकिन उन्होंने अपनी जीत उसे समर्पित की है। घर लौटने पर वह नन्हीं परी को पदक पहनाकर उसके जन्म की खुशी मनाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह पदक उनके लिए बेहद खास है। बेटी के जन्म और देश के लिए पदक जीतने की खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। गोहाना में मोर चौक के पास रहने वाले अशोक मलिक ने जापान में आयोजित एशियाई पैरा खेलों की पुरुषों की 65 किलो पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया।
वह 15 दिन पहले घर से जापान के लिए रवाना हुए थे। उस समय परिवार को अंदाजा नहीं था कि प्रतियोगिता के दौरान ही घर में इतनी बड़ी दोहरी खुशी आएगी। अशोक और गीतिका की शादी एक साल पहले हुई थी। बेटी के जन्म के साथ ही अशोक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर परिवार को दोहरी खुशी दी।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई, बोले- हौसला बनाए रखा
अशोक मलिक की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फेसबुक के माध्यम से उन्हें बधाई दी। अशोक ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनका हौसला बनाए रखा। खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन काफी मायने रखता है और इससे बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा मिलती है।
उनकी सफलता से गोहाना सहित पैतृक गांव मिर्जापुर खेड़ी में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्य उनकी उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
अशोक लंबे समय से दिल्ली में रहकर पावरलिफ्टिंग का अभ्यास कर रहे थे। शारीरिक परेशानी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए यह मुकाम हासिल किया।

पांच साल की उम्र में बीमार हुए
अशोक की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है। उनकी मां केलो देवी के अनुसार, जब वह महज पांच वर्ष के थे, तब उन्हें बुखार हुआ। परिवार उन्हें एक निजी चिकित्सक के पास ले गया।
चिकित्सक ने दवा देने के बजाय इंजेक्शन लगाया। उसी रात घर लौटने के बाद अशोक लड़खड़ाकर गिरने लगे और ठीक से उठ भी नहीं पा रहे थे। बेटे की हालत देखकर परिवार चिंतित हुआ, लेकिन पिता सुरेश ने हिम्मत देते हुए कहा कि बेटा ठीक हो जाएगा।
सुधार नहीं होने पर उन्हें उपचार के लिए रोहतक ले जाया गया, लेकिन वहां भी खास आराम नहीं मिला। इसके बाद दिल्ली में उनका देशी उपचार कराया गया। धीरे-धीरे तबीयत में सुधार हुआ, लेकिन पैरों की कार्यक्षमता पहले जैसी नहीं रही।
बचपन की इस परेशानी ने उनकी राह कठिन बना दी। इसके बावजूद अशोक ने पढ़ाई जारी रखी और खेलों में रुचि बनाए रखी। गोहाना में पावरलिफ्टिंग का अभ्यास शुरू कर उन्होंने मेहनत जारी रखी। मां केलो देवी के लिए बेटे की यह सफलता किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।

2018 में पैरा एशियाई खेलों में टूटी हड्डी
अशोक ने 2018 में इंडोनेशिया में हुए पैरा एशियाई खेलों में भी भाग लिया था लेकिन तब हाथ की हड्डी टूटने से पदक से वंचित रह गए थे। तीन साल तक खेलों से दूर रहे। 2021 में फिर से वापसी की। इसके बाद 2023 में चीन में हुए एशियाई खेलों में ही कांस्य पदक जीता था। अब जापान में रजत पदक जीता।
