जागरण संवाददाता, सोनीपत: हवा कम गति कम होने के साथ ही रविवार को फिर से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। हवा में विषाक्त गैसों के साथ ही धूल व स्माग कणों की मात्रा मानक के आठ गुना से भी ज्यादा हो गई। इसका प्रभाव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। दीपावली पर हुई आतिशबाजी के बाद से वायु प्रदूषण एकाएक बढ़ गया है। हवा में प्रदूषण का असर महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने प्रदूषण से बचकर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई दिन तक तेज हवा चलने, तेज धूप निकलने या बारिश होने के बाद ही प्रदूषण का स्तर नियंत्रित हो सकता है।

प्रदूषण की स्थिति :

वायु गुणवत्ता सूचकांक रविवार को 354 रहा। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 तक ही होना चाहिए। इससे ज्यादा होने पर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। यही हाल पीएम-10 और पीएम-2.5 का भी रहा है। यह भी मानक से कई गुना ज्यादा होने से सेहत पर भारी पड़ रहे हैं।

वायु गुणवत्ता सूचकांक : 354

पीएम-10 ........ 426

पीएम-2.5 .......... 424

कार्बन मोनोआक्साइड .... 63

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स्वास्थ्य पर प्रभाव:

वायु प्रदूषण से लोगों को आंखों में जलन महसूस होने लगी है। इससे आंखों से पानी निकलने, त्वचा में खिचाव महसूस होने, सिरदर्द होने, नजला होने, फ्लू की शिकायत होने और रक्तचाप बढ़ने की समस्याएं होने लगी हैं। दरअसल पीएम-2.5 के कण बेहद महीन होते हैं। वह सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचकर सीधे रक्त में चले जाते हैं। वहां से वह गुर्दे, मस्तिष्क, फेफड़े व गले को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण से लोगों को गले में संक्रमण होने की शिकायत होने लगी है।

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बचाव का तरीका :

प्रदूषण का स्तर कम तापमान में ज्यादा रहता है। हवा ठंडी होने के चलते प्रदूषण की घनी परत वातावरण में छा जाती है। ऐसे में लोगों को सांस लेने में इससे परेशानी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण में सुरक्षित रहना संभव नहीं है। उसके बावजूद सुबह-शाम और रात में ठंड ज्यादा होने पर बाहर निकलने से परहेज करने की सलाह दी गई है। मुंह पर कपड़ा बांधने या मास्क लगाने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से नुकसान से थोड़ा बचाव संभव है। इस सप्ताह तापमान कम होने से प्रदूषण का खतरा भी बना रहने का पूर्वानुमान है।

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प्रदूषण का स्तर फिलहाल सामान्य होने का पूर्वानुमान नहीं है। तेज धूप निकलने और बारिश होने के बाद ही प्रदूषण का स्तर कम हो सकेगा। इस सप्ताह हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम हो सकता है। अपने आसपास के पौधों पर पानी का छिड़काव करें और धूल कणों के सीधे संपर्क में आने से बचने का प्रयास करें।

- डा. प्रेमदीप सिंह, मौसम विज्ञानी, कृषि विज्ञान कें‌र्द्र, सोनीपत।

Edited By: Jagran