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नवरात्र में कुट्टू के आटे की भारी मांग, खरीदारी में न करें ये गलतियां; बिगड़ सकती है सेहत

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:10 AM (IST)

नवरात्र में कुट्टू के आटे की बढ़ती मांग के बीच, पुराना या खुला आटा फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है, जिससे सेहत बिगड़ सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. पुराना कुट्टू आटा फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।

  2. खाद्य सुरक्षा विभाग दुकानों पर आटे की गुणवत्ता जांचेगा।

  3. सीलबंद पैकेट और एक्सपायरी तिथि देखकर ही खरीदें।

जागरण संवाददाता, सोनीपत। शारदीय नवरात्र शुरू होते ही बाजारों में व्रत की खाद्य सामग्री की मांग तेजी से बढ़ गई है। फलाहार में कुट्टू के आटे का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है, लेकिन इसकी खरीदारी करते समय जरा सी लापरवाही आपकी सेहत बिगाड़ सकती है।

आशंका है कि कुछ दुकानदार मुनाफा कमाने के चक्कर में पिछले सीजन का पुराना या खुला आटा बेच सकते हैं। कुट्टू का आटा पुराना होने पर उसमें फंगस और टाक्सिन पैदा हो जाते हैं, जिसका सेवन करने से लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार हो जाते हैं।

कई लोग अस्पताल में भर्ती

जिले में चार वर्ष पहले कुट्टू का आटा खाने से करीब 300 लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें दुकानों, चक्कियों और किराना स्टोरों पर निरीक्षण कर सैंपल भरेंगी।

कुट्टू के आटे और शामके चावल की जांच 

सोनीपत के साथ-साथ गोहाना, खरखौदा और गन्नौर क्षेत्र की दुकानों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। विभाग की टीमें औचक निरीक्षण कर कुट्टू के आटे, शामक के चावल व अन्य फलाहारी उत्पादों की जांच करेंगी।

यदि कहीं पर भी बिना लेबल, खुला या संदिग्ध गुणवत्ता वाला आटा पाया गया, तो तुरंत प्रभाव से सैंपल लेकर लैब में भेजा जाएगा। गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले व्यापारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

क्या है डॉक्टर की सलाह?

वरिष्ठ फिजिशियन डा. संदीप शर्मा ने बताया कि कुट्टू के आटे की शेल्फ लाइफ बहुत कम होती है। नमी के संपर्क में आते ही इसमें हानिकारक फंगस पनपने लगता है, जो शरीर में टाक्सिन बनाता है। हमेशा भरोसेमंद दुकान से सीलबंद पैकेट वाला आटा ही खरीदें, जिस पर पैकिंग व एक्सपायरी तिथि स्पष्ट लिखी हो।

उनका कहना है कि यदि आटे का रंग ज्यादा गहरा हो, उसमें फफूंद जैसा महक आ रही हो या स्वाद कड़वा लगे, तो उसका बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें। कुट्टू का आटा खाने के बाद यदि पेट दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर आना, घबराहट या कंपकंपी जैसे लक्षण दिखें, तो खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल या योग्य चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

जिले भर में कुट्टू के आटे व अन्य व्रत सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए सघन अभियान और छापेमारी शुरू की जाएगी। आजकल ज्यादातर दुकानदार पैक्ड व ब्रांडेड आटा ही बेचते हैं और चक्कियों पर भी ताजा पिसाई का चलन बढ़ा है, फिर भी किसी को भी बासी या खुला आटा बेचने की इजाजत नहीं होगी।

-बिरेंद्र यादव, डेजिग्नेटेड आफिसर (नामित अधिकारी), खाद्य सुरक्षा विभाग, सोनीपत

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