सोनीपत में पराली बनी किसानों की कमाई का जरिया, प्रति एकड़ 9000 से ज्यादा आय; इस सीजन आग का एक केस नहीं
सोनीपत में पराली अब किसानों के लिए आय का साधन बन गई है, जिससे प्रदूषण में कमी आई है और ...और पढ़ें

अब किसानों की कमाई का साधन बनी पराली।
HighLights
पराली अब किसानों के लिए आय का साधन बनी है।
प्रति एकड़ ₹8000 तक की आय, ₹1200 सब्सिडी।
पराली जलाने के मामलों में लगातार कमी आई है।
नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। प्रदूषण का बड़ा कारण मानी जाने वाली पराली अब किसानों के लिए आय का साधन बनी हुई है। सोनीपत ही नहीं प्रदेश के सभी जिलों में धान की कटाई होते ही ठेकेदार कटर, जमा करने व बेलर समेत अन्य मशीनें लेकर खेत पर पहुंच जाता है और पराली के गट्ठे बनाकर उठा ले जाता है।
किसान को प्रति एकड़ चार हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से आठ हजार की आय होती है, वहीं प्रदेश सरकार भी प्रति एकड़ 1200 रुपये की सब्सिडी दे रही है। इसके साथ ही खेत में फसल अवशेष कम होने से जोताई में कम लागत में अगली फसल की बिजाई हो जाती है।
इस सीजन में कटाई शुरू हुए एक सप्ताह बीतने पर पराली जलाने का एक भी केस सामने नहीं आया है। वहीं जिला प्रशासन भी सख्ती के साथ जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। पिछले सालों में किसान पराली को जला देते थे, जिससे जिले के साथ दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ता था।

पिछले पांच साल में जिले में पराली जलाने के केस घटते जा रहे हैं। हर साल जिला प्रशासन मशीनें व अन्य संसाधनों में बढ़ोतरी कर रहा है, जिससे किसान को फसल के अवशेष का प्रबंधन करने में आसानी हो सके।
अनाजमंडी में नहीं बेच सकेंगे फसल
वहीं कृषि विभाग और जिला प्रशासन मिलकर सख्ती के साथ जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है। पराली जलाते पकड़े जाने पर एफआइआर, जुर्माने के साथ ही मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, इससे किसान अनाजमंडी में अपनी फसल नहीं बेच सकता।
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जिला प्रशासन ने हर 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि पिछले साल जिन गांवों में पराली जलने के मामले सामने आए थे, वहां पर 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। वह निगरानी के साथ ही किसानों को जागरूक करेगा।

दूसरी ओर धान कटाई में इस्तेमाल की जा रही कंबाइन हार्वेस्टर में एसएमएस लगाना अनिवार्य किया गया है, यह वह उपकरण है जो धान कटाई के समय अवशेषों को बारीक काटकर खेत में फैला देता है। बिना एसएमएस वाली मशीनों पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
कई साल से पराली जलाने के मामलों में कमी हो रही है। यह जिला प्रशासन की सख्ती और किसानों की जागरूकता का परिणाम है। जिले भर के किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
पराली से अब किसानों को प्रति एकड़ नौ हजार रुपये से अधिक की नकद आय हो रही है, जबकि अगली फसल की जोताई में सैकड़ों रुपये का लाभ हो रहा है। - नवीन हुड्डा, एएई, कृषि विभाग, सोनीपत
पराली जलाने के मामले (वर्षवार आंकड़े)
| वर्ष | हरसैक लोकेशन | आग लगी मिली | चालान काटे | जुर्माना (₹) |
|---|---|---|---|---|
| 2021 | 219 | 72 | 72 | 1,72,500 |
| 2022 | 94 | 35 | 33 | 85,000 |
| 2023 | 78 | 23 | 19 | 47,500 |
| 2024 | 70 | 18 | 17 | 60,000 |
| 2025 | 68 | 11 | 11 | 60,000 |
पिछले साल इन गांवों में जली थी पराली
- घड़वाल
- कथूरा
- निजामपुर
- भंडेरी
- भावड़
- छपरा
- धनाना
- बिधलान
- बुटाना कुंडू
- ईशापुर खेड़ी
- जाजी
- कटवाल
- रिवाड़ा
- खानपुर कलां
- खेड़ी दमकन
- बली
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