जगदीश त्रिपाठी। तीनों कृषि सुधार कानूनों के विरोध में हरियाणा-दिल्ली की सीमा पर स्थित कुंडली बार्डर पर चल रहे धरने में 21 जुलाई को एक ऐसा भाषण दिया गया, जिसकी चर्चा चार दिन तक नहीं हुई। लेकिन 25 जुलाई को जब भाषण देने वाले नेता रुलदू सिंह मानसा को संयुक्त किसान मोर्चे ने निष्काषित कर दिया तो लोग यह जानने को उत्सुक हो गए कि मानसा ने कहा क्या था? लेकिन संयुक्त किसान नेताओं ने यह नहीं बताया। जब निलबंन की घोषणा की गई तो केवल इतना बताया गया कि मानसा ने सिख शहीदों पर आक्षेप किया। अनुचित टिप्पणी की। भड़काऊ भाषण दिया, जो सिख भाईचारे को बिगाड़ने वाला था। लोग सोच में पड़ गए। किस शहीद के खिलाफ मानसा ने टिप्पणी की। लेकिन कोई बताने को तैयार नहीं। कहीं कोई वीडियो क्लिप भी नहीं मिल रही थी।

आखिरकार एक वीडियो क्लिप सामने आई, यद्यपि वह मानसा के भाषण की नहीं थी, बल्कि मानसा के स्पष्टीकरण थी। फिर भी इस क्लिप से स्पष्ट हो रहा है कि उनपर जरनैल सिंह भिंडरावाले पर टिप्पणी करने का आरोप है। क्लिप में मानसा कह रहे हैं कि मोर्चा ने मेरा निलंबन किया है। मुझे उसका फैसला स्वीकार है। मैं मोर्चा के लिए जान दे सकता हूं। लेकिन मुझे क्यों निलंबित किया गया, मेरी गलती तो बताई जाए। कोई कहता है कि भिंडरावाला पर आपने टिप्पणी की। इसपर मानसा कहते हैं कि मैं क्या कोई भी भिंडरावाला पर टिप्पणी नहीं कर सकता। आंदोलन में भिंडरावाला के भाई कुछ दिन पहले आए थे। मुझसे प्रेम से मिले थे। हालचाल पूछा था।

मानसा की इस वीडियो क्लिप के सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि जब मानसा ने भिंडरावाला के बारे में भी कुछ नहीं कहा तो उन्हें क्यों निलंबित किया गया, इसे स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। और यदि उन्होंने भिंडरावाला के बारे में कुछ कहा भी, जिससे अब मुकर रहे हैं तो भिंडरावाला क्या देश के लिए शहीद हुए थे, जिससे उनको शहीद माना जाए। उन्होंने देशद्रोह किया था। सरकार ने कार्रवाई की और मारे गए। इस तरह तो हर आतंकी शहीद हो जाएगा। इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं पर या तो खालिस्तान समर्थक हावी हैं या फिर मोर्चा के नेताओं को खालिस्तान समर्थकों से सहानुभूति है। पहले भी धरनास्थल पर भिंडरावाला के पोस्टर लगते रहे हैं।

खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते रहे हैं, लेकिन इस बार आरोप आंदोलन के ही एक नेता पर है, भले ही वह निलंबन के बाद इन्कार कर रहे हैं। इस प्रकरण में अब तक संयुक्त किसान मोर्चे के नेता राकेश टिकैत, शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का जी, योगेंद्र यादव, हन्नान मौला आदि की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। और तो और पंजाब में चुनाव लड़ने की बात कहने पर निष्कासित किए गए गुरनाम चढ़ूनी ने भी कुछ बोलने से परहेज किया है। वैसे इस प्रकरण से रुलदू सिंह मानसा चर्चित जरूर हो गए हैं।

मानसा की अपनी यूनियन पंजाब किसान यूनियन है। वामपंथी विचारधारा के हैं। अब तक बहुत कम लोग उनके नाम को जानते थे। एक बात और संयुक्त किसान मोर्चे के मौन के निहितार्थ भी सबको पता है।यदि मानसा पर भिंडरावाला की टिप्पणी करने को कारण बताया जाता है तो संयुक्त किसान मोर्चे के नेता खुद फंस जाएंगे और ऐसा करके वे अलगाववादियों से मिलीभगत के आरोप स्वीकार कर लेंगे, जिसपर  अभी तक वे लीपापोती करते रहे हैं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal