दादी ने बुढा़पा पेंशन के 11000 रुपये से किरण को दिलाए थे एथलेटिक्स शूज, अब गोल्ड जीतकर लिखी नई इबारत
एशियाई खेलों में किरण पहल ने टीम इवेंट में रजत और रिले में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन ...और पढ़ें

एशियाई खेलों में किरण पहल ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
HighLights
दादी की पेंशन से खरीदे जूतों से शुरू किया सफर।
आर्थिक चुनौतियों और पिता के निधन के बावजूद नहीं हारी हिम्मत।
एशियाई खेलों में रजत और महिला रिले में स्वर्ण पदक जीता।
आशीष मुदगिल, गन्नौर। एशियाई खेलों में गांव गूमड़ की बेटी किरण पहल की दोहरी सफलता के पीछे उसके लंबे संघर्ष की कहानी छिपी हुई है। किरण ने मेहनत के साथ आर्थिक चुनौतियों को हराकर टीम इवेंट में सिल्वर और रिले में गोल्ड जीते हैं। एक समय ऐसा भी था जब किरण के पास जूते खरीदने तक के रुपये नहीं थे।
किरण की दादी रिसाली देवी ने 2018 में पोती के लिए बुढ़ापा पेंशन के जमा रुपये में 11 हजार रुपये के एथलेटिक्स शूज दिलाए थे, इससे पहले किरण स्कूल के जूतों में ही अभ्यास करती थी। दादी की इसी मदद से किरण ने आज सफलता की इबारत लिख दी है। वर्ष 2022 में बीमारी के चलते पिता का निधन हुआ तो परिवार की जिम्मेदारियां और मुश्किलें बढ़ीं, लेकिन किरण ने ट्रैक नहीं छोड़ा।
मां ने रिश्तेदारों से उधार लेकर फीस का इंतजाम किया
उनकी मां माया देवी ने भी बेटी का हौसला बनाए रखा। एक समय ऐसा भी आया कि जब किरण के पास फेडरेशन कप की फीस जमा कराने के रुपये नहीं थे, लेकिन उनकी मां ने रिश्तेदारों से उधार लेकर फीस का इंतजाम किया। किरण ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कड़ी मेहनत के बल पर देश का नाम रोशन किया है।
किरण ने महिला 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक पदक जीतकर अपने गांव का नाम दुनिया में रोशन कर दिया। किरण को कई बार असफलताओं का सामना भी करना पड़ा। किरण ने वर्ष 2022 में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर में स्वर्ण जीता। चेन्नई में उन्होंने 52.47 सेकेंड का समय निकाला था।
2023 में भारतीय ओपन चैंपियनशिप में वह तीसरे स्थान पर रहीं
यह उनकी पहचान बनाने की शुरुआत थी। इसके बाद उतार-चढ़ाव भी आए। 2023 में भारतीय ओपन 400 मीटर चैंपियनशिप में वह तीसरे स्थान पर रहीं और उसी वर्ष बेंगलुरु की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 56.03 सेकेंड के समय के साथ प्रारंभिक दौर से बाहर हो गई थीं। फिर वर्ष 2024 में किरण ने शानदार वापसी की।
पंचकूला में राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान उन्होंने 400 मीटर में 50.92 सेकेंड का समय निकालकर पेरिस ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई किया। वह 51 सेकेंड से कम समय में 400 मीटर दौड़ने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ के पहले दौर में उन्होंने 52.51 सेकेंड का समय निकालकर सातवां स्थान हासिल किया, लेकिन उनके मेडल का सपना अधूरा ही रह गया।
भारतीय टीम शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ पाई
महिला 4×400 मीटर रिले में भी भारतीय टीम शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद किरण फिर मेहनत में जुट गईं। वर्ष 2026 में उन्होंने भुवनेश्वर में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में 53.17 सेकेंड का समय निकालकर एशियाई खेलों के लिए जगह बनाई। जापान में भी टीम इवेंट में किरण के सफर में एक और उतार-चढ़ाव आया।
400 मीटर के फाइनल में वह 53.41 सेकेंड के समय के साथ पांचवें स्थान पर रहीं और पदक से चूक गईं। इससे पहले मिश्रित 4×400 मीटर रिले के क्वालीफाइंग दौर में किरण ने भारतीय टीम को फाइनल तक पहुंचाने में योगदान दिया था, जिसके बाद भारतीय टीम ने फाइनल में रजत पदक जीता। अब महिला 4×400 मीटर रिले के फाइनल में किरण पहल, एमआर पूवम्मा, प्राची और विथ्या रामराज की भारतीय चौकड़ी ने स्वर्ण पदक जीत लिया।
भारत ने बहरीन को 0.52 सेकेंड से पछाड़ते हुए चीन को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। किरण की इस जीत से मां माया देवी और परिवार का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है और गुमड़ सहित पूरे गन्नौर क्षेत्र में खुशी का माहौल है। किरण के मेडल जीतते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। किरण की मां को महिलाओं ने मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया। किरण के भाई रविंद्र ने बताया कि वापस लौटने पर बहन का भव्य स्वागत किया जाएगा।
