संवाद सहयोगी, खरखौदा (सोनीपत) : गांव सोहटी में एक पशुपालक ने अपनी भैंस की मौत के बाद मंगलवार को उसकी सत्रहवीं मनाई। पशु पालक ने रिश्तेदारों और ग्रामीणों को लड्डू-जलेबी के साथ सब्जी-पूड़ी खिलाए। पशुपालक ने आसपास के आठ गांवों को भी भोज का निमंत्रण दिया था।

दिल्ली की सीमा से सटे गांव सोहटी के रहने वाले जयभगवान उर्फ लीलू एक किसान और पशुपालक हैं। उनके काम की चर्चा क्षेत्र में हो रही है। पशुप्रेम ऐसा कि वर्षों से पाली जा रही एक भैंस को उसकी मौत के बाद उन्होंने उसे अपने प्लाट में ही दफनाया। 17 दिन बाद भैंस की सत्रहवीं का आयोजन कर नाते-रिश्तेदारों और आसपास के आठ गांवों के लोगों को लड्डू-जलेबी व सब्जी-पूड़ी भी खिलाई। इस आयोजन के लिए बाकायदा एक बैंक्वेट हाल को बुक किया गया था, जहां पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।

चार बीघे जमीन के मालिक जयभगवान ने बताया कि वर्ष 1999 में उसके भाई की सुसराल से वह करीब तीन साल की कटिया लेकर आया था। कटिया को उसने अपने बच्चों की तरह पाला। भैंस ने अपने जीवन काल में इस दौरान उसने 21 कटिया और एक कटड़े को जन्मे। लीलू ने भैंस को अपने परिवार सदस्य की तरह पाला और बूढ़ी होने पर बुजुर्ग की तरह सेवा की। वह कुछ दिनों से सोच रहे थे कि अपनी भैंस के जीवित रहते हुए उसका जीवनजग करें लेकिन देवउठनी एकादशी के दिन अचानक भैंस की मौत हो गई। ऐसे में किसान ने भैंस की सत्रहवीं करते हुए रिश्तेदारों और गांव सोहटी के साथ ही आसपास के गांवों में भोज का न्योता दिया।

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