11 पदों में 9 खाली, अब दोनों डॉक्टर भी डेपुटेशन पर; खरखौदा अस्पताल में इलाज पर संकट
खरखौदा के सरकारी अस्पताल में स्वीकृत 11 में से 9 चिकित्सकों के पद पहले से खाली हैं, अब बचे हुए ...और पढ़ें
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ऐसे में दोनों चिकित्सकों के रिलीव होने के बाद अस्पताल में मरीजों की जांच और उपचार व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
HighLights
खरखौदा अस्पताल में 11 में से 9 डॉक्टरों के पद खाली।
बचे हुए दोनों डॉक्टर भी चार माह के लिए डेपुटेशन पर।
मरीजों की जांच और उपचार व्यवस्था पर गंभीर संकट।
जागरण संवददाता, खरखौदा (सोनीपत)। शहर के उपमंडल स्तरीय सरकारी अस्पताल, जिसे पिछले वर्ष फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) का दर्जा मिला था, में चिकित्सकों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी पड़ रही है।
अस्पताल में चिकित्सकों के स्वीकृत 11 पदों में से नौ पहले ही खाली हैं। अब अस्पताल में कार्यरत दोनों चिकित्सकों को भी चार माह के लिए डेपुटेशन पर भेजने के आदेश जारी हुए हैं।
ऐसे में दोनों चिकित्सकों के रिलीव होने के बाद अस्पताल में मरीजों की जांच और उपचार व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर!
अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार डा. नमन दहिया को पीएचसी मोहाना और डाॅ. धीरज को पीएचसी भठगांव में चार माह के लिए डेपुटेशन पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में अस्पताल में यही दो चिकित्सक ओपीडी के साथ आपात सेवाओं को भी संभाल रहे हैं। ऐसे में इनके जाने के बाद अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
एफआरयू का दर्जा, लेकिन चिकित्सकों की कमी
खरखौदा अस्पताल को एफआरयू का दर्जा मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद थी। इसके विपरीत अस्पताल में चिकित्सकों के स्वीकृत पदों में से अधिकांश खाली हैं। वहीं एसएमओ का एक पद भी करीब दो वर्ष से खाली पड़ा है। ऐसे में मरीजों को पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने में अस्पताल प्रशासन को पहले से ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दो चिकित्सक हटे तो बढ़ेगी परेशानी
अस्पताल में रोजाना आसपास के गांवों और शहर से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। वर्तमान में दो चिकित्सकों के सहारे ओपीडी और आपात सेवाएं संचालित हो रही हैं। यदि दोनों को डेपुटेशन पर भेजकर रिलीव कर दिया जाता है तो मरीजों की जांच, उपचार और आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में परेशानी आ सकती है। गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की स्थिति बढ़ने की आशंका है।
अस्पताल में दो ही एमओ हैं, जिनके भी डेपुटेशन के आदेश हुए हैं, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। सिविल सर्जन को स्थिति से अवगत कराते हुए मार्गदर्शन मांगा गया है, ताकि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखा जा सके।
-डाॅ. जितेंद्र रंगा, एसएमओ, एफआरयू।
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