द्वापर युग जैसे दुर्लभ संयोग में मनेगी जन्माष्टमी, जानिए पूजन और व्रत का विशेष धार्मिक महत्व
यह जन्माष्टमी 4 सितंबर को द्वापर युग जैसे दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के साथ मनाई जाएगी, जिसमें अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत मेल होगा।

इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत विशेष और फलदायी रहने वाला है।
HighLights
4 सितंबर को द्वापर युग जैसे दुर्लभ संयोग में जन्माष्टमी।
अर्धरात्रि में अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग का मेल।
राजयोगों के साथ व्रत से संतान सुख, समृद्धि और पाप नाश।
जागरण संवाददाता, सोनीपत। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत विशेष और फलदायी रहने वाला है। 4 सितंबर को मनाए जाने वाले इस महापर्व पर ठीक द्वापर युग जैसा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। इस दिन अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत मेल होगा, जबकि चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि चार सितंबर को तड़के 2:25 बजे से शुरू होकर पांच सितंबर रात 12:13 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर व्रत रखने से संतान सुख, वंश वृद्धि और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
इस वर्ष जन्माष्टमी पर ग्रहों की स्थिति बेहद शुभ
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जन्माष्टमी पर ग्रहों की स्थिति बेहद शुभ फल देने वाली है। देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि और सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में रहेंगे। मंगल और शुक्र की स्थिति से नवपंचम राजयोग का निर्माण हो रहा है, वहीं हंस, मालव्य और बुधादित्य राजयोग के साथ हर्षण योग का प्रभाव भी रहेगा। इस दिन किया गया व्रत, जप और दान-पुण्य साधक के सभी पापों का नाश करके अनंत फल प्रदान करता है।
पूजा विधि और जन्मोत्सव की परंपरा
व्रत का संकल्प लेकर श्रद्धालु सुबह बालगोपाल को झूले में विराजमान करें। रात 12 बजे जन्मोत्सव के समय कान्हा का पंचामृत से अभिषेक करें। तत्पश्चात लड्डू गोपाल को नए वस्त्र, मुकुट और माला से सजाएं। उन्हें चंदन, रोली और अक्षत लगाकर माखन-मिश्री का भोग लगाएं। पूजन के दौरान ओउम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप और 108 नामों का स्मरण करना कल्याणकारी माना गया है।
दिनभर के चौघड़िया और पूजन के शुभ मुहूर्त
- चर (सामान्य) : सुबह 6:00 से 7:35 बजे तक
- लाभ (उन्नति) : सुबह 7:35 से 9:10 बजे तक और रात 9:30 से 10:55 बजे तक
- अमृत (सर्वोत्तम) : सुबह 9:10 से 10:45 बजे तक
- शुभ (उत्तम) : दोपहर 12:20 से 1:55 बजे तक और रात (5 सितंबर अलसुबह) 12:20 से 1:45 बजे तक
- व्रत का पारण अगले दिन 5 सितंबर को सूर्योदय के पश्चात सुबह 6:24 बजे के बाद किया जा सकेगा।
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