2600 सीट वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में रोजाना मात्र 80 यात्री कर रहे सफर, क्या रूट बदलने से बढ़ेंगे पैसेंजर्स?
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन यात्रियों की भारी कमी से जूझ रही है। 2600 सीटों वाली यह ट्रेन जींद-गोहाना-सोनीपत रूट ...और पढ़ें
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रोजाना औसतन मात्र 80 यात्री ही हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं। फाइल फोटो
HighLights
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की भारी कमी।
2600 सीट क्षमता के बावजूद रोज सिर्फ 80 यात्री।
रूट विस्तार और टिकटिंग सुधार पर विचार जारी।
नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन यात्रियों की भारी कमी से जूझ रही है। 17 जुलाई को जींद में इस ट्रेन को नई क्रांति का सूत्रपात बताते हुए शुभारंभ किया गया था। जींद-गोहाना-सोनीपत के करीब 89 किमी लंबे रूट पर 2600 यात्रियों के बैठने की क्षमता वाली विश्व की सबसे लंबी व शक्तिशाली ट्रेन सप्ताह में छह एक चक्कर लगाती है। हालांकि, रोजाना औसतन मात्र 80 यात्री ही इसमें यात्रा कर रहे हैं।
एक माह में मात्र 1035 यात्रियों ने किया सफर
शुक्रवार को सफाई व धुलाई के लिए यह बंद रहती है। 20 जुलाई से लेकर 20 अगस्त तक एक महीने में सोनीपत से गोहाना व जींद के लिए सिर्फ 1035 यात्रियों ने सफर किया है। करीब इतने ही यात्री जींद से गोहाना व सोनीपत तक आए हैं। यानी एक महीने में मात्र 2070 यात्रियों ने इस ट्रेन में यात्रा की। ऐसे में जब ट्रेन महीने में मात्र 26 दिन ही संचालित होती है तो प्रतिदिन के औसतन यात्रियों का आंकड़ा 80 ही पाया जा रहा है। ऐसे में रेलवे के अधिकारी इसके रूट को दिल्ली तक बैढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, ताकि यात्रियों की कमी को दूर किया जा सके।
यात्रियों की कमी का संकट
17 जुलाई को प्रधानमंत्री ने जींद के पांडु-पिंडारा स्टेशन देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया था। इसे जींद से गोहाना होते हुए सोनीपत रूट पर चलाया गया है। जींद से चलकर यह ट्रेन सुबह 9:40 बजे पहुंचती है, जबकि सोनीपत से एक घंटे बाद 10:40 बजे गोहाना के लिए चलती है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब यात्रियों की कमी के संकट से जूझ रही है।
अब तक सीटिंग कैपेसिटी न छू सकी ट्रेन
20 जुलाई से 20 अगस्त तक एक महीने में सोनीपत से गोहाना के लिए 507 तो जींद के लिए 538 लोगों ने यात्रा की। इतने या इससे भी कम लोग इस ट्रेन के जरिये जींद से गोहाना व सोनीपत पहुंचे हैं। एक महीने में यह ट्रेन अपनी सीटिंग कैपेसिटी 2600 का आंकड़ा तक नहीं छू सकी है। आठ यात्री कोच व दो इंजन वाली यह ट्रेन विश्व की सबसे लंबी व सबसे शक्तिशाली ट्रेन है। अन्य देशों में चार कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन चल रही हैं।
जागरण सुझाव: पानीपत-सोनीपत-दिल्ली रूट पर चलाएं
रेलवे के अधिकारी यात्रियों की कमी से निपटने के लिए इसका रूट जींद-गोहाना-सोनीपत से दिल्ली तक करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन अगर इसे जींद से पानीपत-सोनीपत-दिल्ली रूट पर चलाया जाए तो इसके लिए पर्याप्त यात्री उपलब्ध हैं।
पानीपत से दिल्ली और दिल्ली से पानीपत रूट पर सुबह-शाम लोकल ट्रेनों में बैठने को दूर की बात खड़े होने तक ही जगह यात्रियों को नहीं मिलती। ऐसे में इसे अगर जींद-पानीपत-सोनीपत-दिल्ली रूट पर चलाया जाए तो यह यात्रियों के लिए सुविधाजक होगा।
"देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की स्पीड और दूरी बढ़ाने के लिए टेक्निकल ट्रायल चल रहे हैं। ट्रायल के सफल समापन की रिपोर्ट के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे। जल्द ही इसका रूट बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।"
-पुष्पेश रमण त्रिपाठी, डीआरएम, दिल्ली मंडल।
सोनीपत-गोहाना के बीच टिकटिंग की व्यवस्था नहीं
सोनीपत-गोहाना रूट पर यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए हाल्ट वीरान पड़े हैं। हालात यह हैं कि रभड़ा, लाठ और बड़वासनी हाल्ट पर यात्रियों के लिए टिकट लेने की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में इन स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है।
इन तीनों हाल्ट पर रेलवे की तरफ से टिकट देने के लिए कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। यात्रियों को इन तीनों स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर किसी दूसरे स्टेशन तक जाना हो तो मौके पर टिकट नहीं मिल पाती।
इस रेलखंड पर सोनीपत और गोहाना के बीच केवल मोहान स्टेशन पर टिकटिंग की व्यवस्था है। यहां पर ट्रेन का ठहराव लगभग एक-दो मिनट होता है। इससे सफर के दौरान यात्री यहां से भी टिकट नहीं ले पाते हैं। यात्रियों को सोनीपत या गोहाना पहुंचकर ही टिकट लेनी पड़ती है।
