भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का कमाल, जींद-सोनीपत रूट पर तय की 6000 KM की दूरी; 36 टन कार्बन उत्सर्जन घटा
भारत की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल-संचालित यात्री ट्रेन ने जींद-सोनीपत मार्ग पर 6,000 किलोमीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय की है। ...और पढ़ें

जींद और दिल्ली के बीच दौड़ती है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन। फोटो: आर्काइव
HighLights
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने 6000 किमी तय किए
इसने 36 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम किया है
जींद-सोनीपत मार्ग पर सफलतापूर्वक चल रही यह ट्रेन
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल-संचालित यात्री ट्रेन जींद-सोनीपत मार्ग पर सफलतापूर्वक चल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जुलाई को इसका उद्घाटन किया था।
इसके बाद ट्रेन अब तक करीब 6,000 किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी है। स्वच्छ हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक को अपनाने की दिशा में इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
हाइड्रोजन से बनाती है बिजली
हाइड्रोजन ट्रेन दो 1,200 किलोवाट हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणालियों से संचालित होती है। इसमें आनबोर्ड ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली पैदा करते हैं, जिसका इस्तेमाल ट्रेन को चलाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में जल वाष्प और गर्मी निकलती है।
करीब 36 टन CO₂ उत्सर्जन कम
हाइड्रोजन ट्रेन का पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। एक पारंपरिक डीईएमयू प्रति किलोमीटर करीब 6.074 किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन करती है।
इस आधार पर हाइड्रोजन ट्रेन द्वारा 6,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने पर करीब 36,444 किलोग्राम यानी लगभग 36 टन CO₂ उत्सर्जन कम हुआ।
पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता होगी कम
हाइड्रोजन आधारित तकनीक पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करती है। इससे रेल यात्रा को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
सामान्य डीईएमयू के बराबर किराया
हाइड्रोजन ट्रेन का किराया सामान्य डीईएमयू सेवा के बराबर है। यात्रियों को इसके लिए 10 से 25 रुपये के बीच किराया देना होता है।
जींद में ईंधन भरने की सुविधा
10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन के लिए जींद में स्वदेशी रूप से निर्मित हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
