अब दिल्ली तक चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, यात्रियों को लुभाने के लिए रेलवे ने बनाया नया प्लान
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की कमी के चलते रेलवे नए समय और दिल्ली तक रूट विस्तार पर ...और पढ़ें

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन।
HighLights
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की कमी।
रेलवे ने नए समय और दिल्ली तक रूट विस्तार का प्रस्ताव दिया।
सुबह-शाम के समय से अन्य ट्रेनों से लिंक करने की योजना।
नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लिए यात्रियों की कमी से निपटने के लिए रेलवे में मंथन शुरू हो गया है। डीआरएम की ओर से अधिकारियों को इस नए समय पर चलाने के लिए प्रस्ताव मांगा गया। अधिकारियों ने प्रस्ताव भेजते हुए नए समय का प्रस्ताव भेजा है।
अब अनुमति मिलने के बाद इसे नए समय पर चलाने की तैयारी है, ताकि इसे अधिक यात्री मिल सके। इसका रूट दिल्ली तक करने के लिए सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही इसे दिल्ली तक चलाया जा सकता है। इसकी घोषणा रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव ने इसके शुभारंभ अवसर पर ही कर दी थी।
जींद की धरती से 17 जुलाई को देश की पहली आठ यात्री कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया गया था। जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर 19 जुलाई से इसे आम यात्रियों के लिए शुरू किया गया था, लेकिन शुरुआत से ही यह यात्रियों की कमी के संकट से जूझ रही है।
2600 यात्रियों के बैठने की क्षमता वाली विश्व की सबसे लंबी और शक्तिशाली ट्रेन में 20 जुलाई से 20 अगस्त तक एक महीने में मात्र दो हजार यात्रियों ने सफर किया। यात्रियों की कमी को देखते हुए दिल्ली मंडल के डीआरएम ने सोनीपत के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगा कि हाइड्रोजन ट्रेन को किस समय चलाया जा सके, ताकि इसे अधिक यात्री मिल सके। अधिकारियों ने प्रस्ताव भेजकर यात्रियों की कमी के कारणों व नए समय का उल्लेख किया गया है।
यह हैं यात्री नहीं मिलने के कारण
1. किसी अन्य ट्रेन से लिंक न होना
हाइड्रोजन ट्रेन में अभी सिर्फ स्थानीय यात्री ही सफर कर रहे हैं, क्योंकि यह किसी अन्य ट्रेन से लिंक नहीं है। इसमें जींद व गाेहाना से सोनीपत के लिए और सोनीपत से गोहाना व जींद के लिए सिर्फ स्थानीय यात्री ही चढ़ते हैं। जींद, गोहाना से दिल्ली जाने वाले लोग इसमें नहीं चढ़ते, क्योंकि इसका मौजूदा चलने का समय ऐसा है कि इससे आगे के लिए गाड़ियां नहीं मिल पाती।
2.जींद-गोहाना-सोनीपत और सोनीपत-गोहाना-जींद
इसके बीच में पड़ने वाले स्टेशन व हाल्ट आबादी से तीन से चार किमी दूर हैं। गांवों से इन स्टेशनों के बीच आवागमन के लिए कोई साधन नही हैं। ट्रेन पकड़ने व ट्रेन से उतरकर गांव जाने के लिए यात्रियों को पैदल आवागमन करना पड़ता है। कई हाल्ट पर टिकट भी नहीं मिलते, इसलिए लोग ट्रेन में सफर ही नहीं करते। दूसरे साधन उन्हें गांव से मिल जाते हैं और गांव में ही उतार देते हैं।
- 9:40 बजे सुबह सोनीपत पहुंचती है हाइड्रोजन ट्रेन
- 10:10 बजे सुबह सोनीपत से गाेहाना के लिए चलती है
यह है प्रस्ताव
अधिकारियों ने प्रस्ताव में लिखा है कि हाइड्रोजन ट्रेन सुबह पौने छह बजे जींद से चले और साढ़े सात बजे सोनीपत पहुंचे तो इसमें दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए तीन लोकल ट्रेनें 7:35 बजे, 7:50 बजे और 8:10 बजे मिल सकती हैं। इसके साथ ही 9:28 बजे झेलम एक्सप्रेस भी मिल सकती है। इससे ट्रेन में जींद व गोहाना से दिल्ली जाने वाले यात्री भी मिल जाएंगे।
वहीं दिन में इसे जींद में खड़ रखने की बजाय सोनीपत रेलवे स्टेशन पर खड़ा रखा जाए और शाम को साढ़े पांच बजे गोहाना-जींद के लिए रवाना किया जाए तो दिल्ली से 5:05 बजे सोनीपत पहुंचने वाली लोकल जिसमें बहुत भीड़ आती है, के यात्री भी हाइड्रोजन ट्रेन में गोहाना व जींद जा सकते हैं। इस समय पर चलाने से उम्मीद है कि इस ट्रेन को अधिक यात्री मिल सकेंगे।
जागरण सुझाव
हाइड्रोजन ट्रेन को जींद से गोहाना की बजाय पानीपत होते हुए सोनीपत व दिल्ली तक चलाया जाए और इसी रूट से वापसी की जाए तो इसके लिए यात्रियों की कोई कमी नहीं रहेगी। इस रूट पर हर समय पर्याप्त से भी अधिक संख्या में यात्री उपलब्ध हैं। इसे किसी भी समय चलाया जा सकता है।
