संवाद सूत्र, ऐलनाबाद : स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव का दंश झेल रहे ऐलनाबाद वासियों को 27 जनवरी 2004 को प्रदेश सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में तोहफा दिया था। लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें सरकार द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ प्राप्त होगा परंतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के कुछ समय बाद ही उम्मीदें धराशायी हो गईं। उद्घाटन के 14 वर्षों बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। आलम यह था कि इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय एवं गैर चिकित्सकीय पदों को मिलाकर चार दर्जन से अधिक पद खाली पड़े थे। सरकार ने इस नागरिक अस्पताल में इस एक पखवाड़े के दौरान 27 नए कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी है जिन्होंने अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। इस नई नियुक्ति में अस्पताल में चार कंप्यूटर ऑपरेटर, दो इलेक्ट्रीशियन, एक माली, चार सफाई कर्मचारी, 11 वार्ड बॉय, 3 सिक्योरिटी गार्ड, एक सीवर मेन, एक पलंबर शामिल है। इतना होने के बावजूद भी अभी विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनेक पद खाली पड़े हैं वही एक्स-रे मशीन रूम के लंबे समय से ताला लगा हुआ है जिसका यहां पहुंचने वाले रोगियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। नागरिको का मानना है कि इसी गति से नए कर्मचारियों की नियुक्ति होती रहे तो शीघ्र ही यह अस्पताल यहां पहुंचने वाले रोगियों को उत्तम दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में सफल हो सकेगा।

समाजसेवी नरेश दायमा ने कहा कि अब भी खाली पड़े 32 पदों पर नियुक्ति हो तब जाकर इस अस्पताल को सही मायनों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कहा जा सकता है। इस अस्पताल के उद्घाटन के समय यहां करीब लाखों रुपये की लागत से एक्सरे मशीन स्थापित की गई थी लेकिन एक्सरे टेक्रीशियन के न होने के कारण इस कमरे को पिछले 14 वर्षों से ही ताला लगा हुआ है और यह एक्सरे मशीन धूल फांक रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सरदाना व मांगे राम सहारण ने कहा कि अस्पताल के निर्माण के समय ही यहां पोस्टमार्टम रूम बनाया गया था, उसका भी आज तक ताला नहीं खुल पाया है। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 250 मरीज उपचार के लिए आते हैं। प्रतिमाह 70 से 80 डिलीवरी केस, 100 से 125 हर तरह के बड़े ऑप्रेशन, 60 से 70 नसबंदी ऑप्रेशन होते है, लेकिन चिकित्सकों के अभाव में मरीजों की सार-संभाल करे तो कौन।

Posted By: Jagran

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