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सिरसा में पैक्स में खाद के वितरण में धांधली का आरोप, बीकेई ने दी आंदोलन की चेतावनी

Published: Fri, 09 Oct 2026 04:00 PM (GMT+05:30)

भारतीय किसान एकता ने सिरसा में खाद वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। संगठन ने पैक्स को उचित कोटा न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख। फाइल फोटो

भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख। फाइल फोटो

HighLights

  1. भारतीय किसान एकता ने खाद वितरण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया।

  2. पैक्स को खाद का बराबर कोटा न मिलने की शिकायत की गई।

  3. संगठन ने निष्पक्ष वितरण न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

जागरण संवाददाता, सिरसा। भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने राज्य में खाद वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तय नियमानुसार खाद का 60 प्रतिशत कोटा को-आपरेटिव सेक्टर (पैक्स) तथा 40 प्रतिशत कोटा प्राइवेट सेक्टर के लिए निर्धारित है, ताकि गांवों के अंतिम छोर तक किसान को आसानी से खाद मिल सके।

किसान नेता ने बताया कि सिरसा जिले में 38 पैक्स और उनके अधीन 201 बिक्री केंद्र संचालित हैं, जो पूरे जिले के गांवों को कवर करते हैं। इसके बावजूद पैक्स समितियों को खाद का बराबर कोटा नहीं दिया जा रहा। इस समस्या को लेकर जब वे हैफेड के डीएम राजेश हुड्डा और को-आपरेटिव बैंक के जीएम ऋषि पाल से मिले, तो अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब देने के बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लिया।

रसूखदारों व प्राइवेट सोसाइटियों का कब्जा

औलख ने आरोप लगाया कि हैफेड, इफको व कृभको के आने वाले रैक में से पैक्स को उचित आवंटन देने के बजाय एफपीओ और प्राइवेट मल्टीपर्पज सोसाइटियों को हजारों बैग सीधे सप्लाई किए जा रहे हैं। इन नई सोसाइटियों में पूंजीपति और राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख वाले लोग शामिल हैं। सिरसा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिले फतेहाबाद में भी खाद की इसी तरह बंदरबांट हो रही है।

सरकार को भेजी शिकायत

औलख ने बताया कि इस पूरे मामले की विस्तृत शिकायत हरियाणा सरकार तथा कृषि महानिदेशक को भेज दी गई है, जिसमें नियम दरकिनार कर खाद हासिल करने वाली सोसाइटियों के नाम भी उजागर किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गांवों की पैक्स के माध्यम से किसानों को निष्पक्षता से खाद का वितरण न हुआ, तो संगठन जल्द ही संघर्ष का रास्ता अख्तियार करेगा।