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फल - सब्जियों में कीटनाशक व फर्टिलाजर की होगी जांच, 1.94 करोड़ की लागत से स्थापित हुई गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला

ऑर्गेनिक फलों व सब्जियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सिरसा में एक

By JagranEdited By: Published: Wed, 09 Dec 2020 05:43 AM (IST)Updated: Wed, 09 Dec 2020 05:43 AM (IST)
फल - सब्जियों में कीटनाशक व फर्टिलाजर की होगी जांच, 1.94 करोड़ की लागत से स्थापित हुई गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला
फल - सब्जियों में कीटनाशक व फर्टिलाजर की होगी जांच, 1.94 करोड़ की लागत से स्थापित हुई गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला

जागरण संवाददाता, सिरसा : ऑर्गेनिक फलों व सब्जियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सिरसा में एक करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला बनाई गई है। यह प्रयोगशाला राज्य की दूसरी गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला है। सरकार द्वारा एक प्रयोगशाला करनाल जिले के घरोंडा में भी स्थापित की गई है। कोरोना काल के चलते प्रयोगशाला में अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है लेकिन जल्द ही जांच कार्य शुरु हो जाएगा जिससे किसान प्रयोगशाला की सुविधा का लाभ ले सकेंगे। ----------------- फल व सब्जियों में फर्टिलाइजर व पेस्टिसाइड का पता चल सकेगा

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प्रयोगशाला का उद्देश्य फल व सब्जियों के नमूने में कीटनाशक अवशेषों की उपलब्धता की जांच, कीटनाशक अवशेषों की मॉनिटरिग के साथ-साथ किसानों को कीटनाशक दवाओं का समुचित उपयोग व प्रबंधन के लिए जागरूक करना है। किसानों को उनके फल व सब्जियों में प्रयोग किए जा रहे फर्टिलाइजर व पेस्टिसाइड के मात्रा का पता चलेगा। खेती में कीटनाशकों व रासायनिक खादों की होड़ पर अंकुश लगाने के लिए यह प्रयोगशाला स्थापित की गई है। प्रयोगशाला से कोई भी व्यक्ति अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच के साथ-साथ बागवानी की फसलों में प्रयोग होने वाली खाद व दवाई के पैमाने की जांच भी करवा सकता है। --------- आधुनिक मशीनों से फल, सब्जियों में पेस्टिसाइड की होगी जांच

प्रयोगशाला के इंचार्ज साधुराम झोरड़ ने बताया कि कोविड-19 के चलते इस लैब में अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। तकनीकी स्टाफ की तैनाती हो चुकी है और जल्द ही प्रयोगशाला में काम शुरू हो जाएगा। इस आधुनिक प्रयोगशाला में रोटरी वैक्यूम इवपोरटर, एचपीएलसी, यूवी स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, लमीनार फ्लो कैबिनेट, लेबोरेटरी सेंट्रीफ्यूज, मुफ्फ्ले फर्नेस, हॉट एयर ओवन व डीप फ्रीजर मशीनें स्थापित है। उन्होंने बताया कि फसलों में बहुत अधिक फर्टिलाईजर, पेस्टिसाइड आदि कीटनाशक दवाओं का प्रयोग हो रहा है। जो न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति को खत्म करता है, वहीं कैंसर जैसी बीमारियों में सहायक हो रहा है।

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परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी अपना कर आमदनी बढ़ा सकते हैं किसान

उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि इस प्रयोगशाला की मदद से किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा कर अन्य फसल विविधिकरण को बढ़ावा दे सकते हैं। किसान गेहूं, धान, कपास जैसी परंपरागत खेती से न तो अधिक उत्पादन ले सकता है और न ही अधिक मूल्य लिया जा सकता है। इसके साथ-साथ आधुनिक खेती, बागवानी व अन्य खेती से जुड़े व्यवसाय को अपनाकर अपने आय में बढ़ोतरी कर सकता है। उल्लेखनीय है कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने बीती 6 जनवरी को इस प्रयोगशाला को जिला के किसानों को समर्पित किया था।


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