जागरण संवाददाता, सिरसा : बरनाला रोड स्थित शहीद भगत सिंह स्टेडियम में तीन कृषि कानूनों के विरोध में पक्का मोर्चा के बैनर तले रविवार को 13वें दिन भी किसानों ने धरना दिया। धरने का पंजाब संगठनों के सांझे मोर्चा व किसान संघर्ष समिति हरियाणा के केंद्रीय नेता कुलवंत सिंह संधू ने समर्थन देते हुए कहा कि किसानों के हकों की लड़ाई पंजाब-हरियाणा मिलकर लड़ेंगे। उन्होंने बताया कि 26 व 27 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में लाखों लोग शामिल होंगे और सरकार को किसान विरोधी तीनों काले कानून वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे।

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हरियाणा में अच्छी शुरुआत

उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर व छोटा व्यापारियों की एकता पहली बार देश में हुई है। पंजाब में सभी टोल प्लाजा बंद कर दिए गए हैं। बड़ी संख्या लोग पंजाब के हर रोज आंदोलन में भाग ले रहे हैं। हरियाणा ने भी अच्छी शुरुआत की है। आंदोलन सरकार के कफन में आखिरी कील ठोकने काम करेगा। किसान संघर्ष समिति हरियाणा के राज्य कन्वीनर मनदीप नथवान ने कहा कि हमारा आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। हजारों लोग पक्का मोर्चा से जुड़ रहे हैं। लोग अपने आप आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। यह किसान आंदोलन के लिए अच्छा संकेत है। 19 अक्टूबर से जो अभियान इस पक्का मोर्चा से चलेगा वो 24 अक्टूबर को उचाना में प्रवेश करेगा, जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे। नथवान ने कहा कि उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व बिजली मंत्री रणजीत सिंह का नेताओं को अब किसानों से नहीं, बल्कि कुर्सी से अधिक प्यार है। किसानों को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जोगिद्र नैन व हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने भी किसानों को संबोधित किया। ------------------- किसान आंदोलन के समर्थन में कंडेला में भी धरना शुरू

जागरण संवाददाता, सिरसा : कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों द्वारा सिरसा में दिए जा रहे धरने के समर्थन में रविवार से जींद के कंडेला में भी किसानों ने धरना शुरू कर दिया है। यह जानकारी देते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जोगेंद्र घासी राम नैन ने बताया कि किसानों के समर्थन में नरवाना के गढ़ी, उकलाना में गोपाल की ढाणी व करनाल में धरने चल रहे हैं। इसी कड़ी में कंडेला में भी किसानों ने धरना शुरू किया है। चौ. आजाद सिंह रेडू, भाकियू के जिया लाल, दल्लू कंडेला, सत्तड़ नगूरा की अगुवाई में कंडेला में धरना शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार किसानों की मांगों को मानते हुए कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती अथवा बदलाव नहीं कर देती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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