जागरण संवाददाता, सिरसा:

पुलिस थाने में संपर्क करने पर पुलिस कर्मचारी के व्यवहार का आंकलन अब अधिकारी नहीं अब जनता तय कर रही है। एसएसपी ने एक नया प्रयोग किया है, जिसमें अपनी शिकायत लेकर आने वाले शिकायतकर्ता को कुछ समय पुलिस के लिए देने को कहा जाता है। फिर उसके सामने लिस्ट रखी जाती है, जिसमें थाने के लैंडलाइन नंबर, थाना प्रभारी व चौकी प्रभारियों के नंबर होते हैं। उनमें से किसी तीन पर कॉल कर पुलिस के व्यवहार की जानकारी अधिकारी ले रहे हैं।

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व्यवहार कैसा, इसी पर अगली कार्रवाई भी तय

एसपी ऑफिस पहुंचे व्यक्ति से अपने ही नंबर से उसे कॉल करने को कहा जाता है। सामने से पुलिसकर्मी ने मैत्रीपूर्ण क्या शब्द बोले और उसका व्यवहार कहीं अखरने वाला तो नहीं था। उसकी रिपोर्ट कंपलेंट क्लर्क मौके पर ही नोट करता है। दिन में तीन या चार शिकायतकर्ताओं से ऐसी कॉल करवाई जाती है और फिर इसकी रिपोर्ट एसएसपी के समक्ष रखी जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पुलिस कर्मचारी को या तो प्रशंसा पत्र या फिर भाषा सुधारने की सलाह दी जाती है। बहुत ही रफ भाषा होने पर नोटिस दिया जाता है।

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पांच जनवरी से शुरू की गई थी मुहिम

पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार पांच जनवरी से शुरू की गई इस मुहिम में ज्यादातर पुलिस कर्मियों का काम अच्छा पाया गया है। 13 टेलीफोन अटैंड करने वालों को अच्छा मानते हुए प्रोत्साहित किया गया है और उन्हें प्रशंसा पत्र दिये गए हैं जबकि चार के काम का आंकलन फीड बैक के आधार पर अच्छा नहीं रहा, उन्हें नोटिस दिया गया है। पुलिस के अनुसार मैं फलां थाना से फलां बोल रहा हूं, बताएं मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं। बताएं मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं। इस वाक्य को सबसे अच्छा माना गया है। उन्हें किसी को संबोधन करने में श्रीमान और श्रीमती जी का प्रयोग करने के निर्देश दिये गए हैं।

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जनता से कैसा व्यवहार किया जा रहा है और कहीं कोई रफ भाषा तो प्रयोग नहीं कर रहा। इसकी जानकारी जनता से ही मिल सकती है, इसलिए फीड ले रहे हैं। जिनकी फीडबैक अच्छा आ रही है, उन्हें प्रशंसा पत्र दे रहे हैं और जो रफ व्यवहार कर रहे हैं, उन्हें नोटिस भी दे रहे हैं।

डा. अरुण ¨सह, एसएसपी, सिरसा

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