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ब्रिटेन में मेयर बने दोनों मां-बेटे पहुंचे रोहतक, कहा- हम भारतीय संस्कृति को बढ़ाएंगे आगे

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:26 PM (IST)

रोहतक के तुषार दहिया और उनकी मां परवीन रानी ने ब्रिटेन की स्थानीय राजनीति में मेयर बनकर परिवार और शहर का नाम रोशन किया है।

रोहतक के मां-बेटे ने ब्रिटेन में मेयर बनकर रचा इतिहास, तुषार सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर।

रोहतक के मां-बेटे ने ब्रिटेन में मेयर बनकर रचा इतिहास, तुषार सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर।

HighLights

  1. तुषार दहिया ब्रिटेन के सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर बने

  2. मां परवीन रानी हर्ट्समेयर बरो परिषद की मेयर चुनी गईं

  3. दोनों की प्राथमिकता स्थानीय समस्याओं का समाधान और संस्कृति प्रचार

रत्न पंवार, प्रियंका देशवाल, रोहतक। सेक्टर-34 निवासी तुषार दहिया और उनकी मां परवीन रानी ने ब्रिटेन की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर परिवार और रोहतक का नाम रोशन किया है।

मेयर बनने के बाद दोनों पहली बार भारत पहुंचे तो घर पर परिवार और रिश्तेदारों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। फूल-मालाएं पहनाकर और केक काटकर खुशी मनाई गई। परिवार के सदस्य ढोल की थाप पर झूमते नजर आए।

भारतीय मूल के सबसे युवा मेयर बने तुषार

23 वर्षीय तुषार दहिया ब्रिटेन में मेयर बनने वाले सबसे युवा भारतीय मूल के व्यक्ति बने हैं। उनकी मां परवीन रानी भी हर्ट्समेरे बरो परिषद की मेयर चुनी गई हैं। मां-बेटे की इस उपलब्धि से परिवार में उत्साह का माहौल है। रोहतक पहुंचने पर दोनों से विशेष बातचीत की गई।

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परवीन रानी ने कहा कि अपने देश और घर लौटने पर मिला प्यार और सम्मान उनके लिए बेहद भावुक पल है। उन्होंने इस उपलब्धि को परिवार के साथ देश के लिए भी गर्व का विषय बताया। तुषार और परवीन का सफर सामुदायिक सेवा से शुरू होकर स्थानीय राजनीति में जिम्मेदारी तक पहुंचा है।

दोनों की प्राथमिकता ब्रिटेन में रहने वाले लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। इसके साथ ही वे भारतीय भाषा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर देना चाहते हैं। विदेश में सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारी निभाने के बाद घर लौटे मां-बेटे का स्वागत परिवार के लिए यादगार अवसर बन गया।

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सवाल: ब्रिटेन की स्थानीय राजनीति में मेयर बनने तक का आपका सफर कैसे शुरू हुआ?

तुषार दहिया: मैंने करीब 16 साल की उम्र में सामुदायिक सेवा शुरू की थी। लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना और उनके लिए काम करना मुझे अच्छा लगता था। मेरी मां से भी मुझे प्रेरणा मिली। इसी काम के अनुभव ने मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। 20 साल की उम्र में पार्षद बना और वर्ष 2025 में उपमेयर की जिम्मेदारी मिली। अब मैं एल्स्ट्री और बोरेहमवुड टाउन काउंसिल का मेयर हूं।

सवाल: इतनी कम उम्र में मेयर बनने के बाद आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?

तुषार दहिया: मेरी प्राथमिकता स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना है। महंगाई और जीवनयापन का बढ़ता खर्च लोगों के लिए बड़ी चिंता है। इसके अलावा किफायती आवास, बेहतर सुविधाएं और हरित क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। मैं चाहता हूं कि युवा भी सामुदायिक सेवा में आगे आएं और अपने आसपास के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

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सवाल: चुनाव के दौरान लोगों से जुड़ने का आपका अनुभव कैसा रहा?

तुषार दहिया: लोगों तक पहुंचने के लिए घर-घर जाकर संपर्क किया। हर व्यक्ति से बात करना आसान नहीं होता। कई बार लोग दरवाजा भी नहीं खोलते, लेकिन जनसेवा में धैर्य रखना जरूरी है। लोगों की समस्याएं सुनना और उनके बीच विश्वास बनाना ही इस काम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सवाल: भारतीय मूल के लोगों के लिए आप क्या करना चाहते हैं?

तुषार दहिया: मैं चाहता हूं कि भारतीय मूल के लोगों को सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासन की सुविधाओं की जानकारी आसानी से मिले। कई बार सही जानकारी नहीं होने से लोग उपलब्ध सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते। इसके साथ ही भारतीय भाषा, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी जरूरी है।

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सवाल: परवीन रानी जी आपका राजनीतिक सफर कैसे शुरू हुआ?

परवीन रानी: हमारा परिवार वर्ष 2013 में ब्रिटेन आया था। मेरे माता-पिता से मुझे समाजसेवा की प्रेरणा मिली। मैंने स्थानीय और भारतीय समुदाय के लोगों के साथ काम करना शुरू किया। विभिन्न त्योहारों और सामुदायिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने से आपसी विश्वास मजबूत हुआ। वर्ष 2023 में पार्षद चुने जाने के बाद मुझे स्थानीय प्रशासन में काम करने का अवसर मिला। आगे चलकर मैंने स्ट्रीट सीन, पार्क, मनोरंजन और संस्कृति से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद हर्ट्समेयर की उपमेयर बनी और अब हर्ट्समेयर बरो काउंसिल की मेयर हूं।

सवाल: भारतीय मूल की महिला के रूप में राजनीति में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

परवीन रानी: स्थानीय राजनीति में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। लोगों का विश्वास जीतना और उनकी जरूरतों को समझना जरूरी था। मैंने समुदाय के बीच रहकर काम करने पर ध्यान दिया। जब लोगों को लगा कि हम उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हैं और उनके साथ खड़े रहते हैं, तो हमारा जुड़ाव मजबूत हुआ।

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सवाल: ब्रिटेन में पली-बढ़ी भारतीय मूल की नई पीढ़ी को हिंदी सिखाने की पहल क्यों की?

परवीन रानी: ब्रिटेन में जन्मे और पले-बढ़े कई भारतीय मूल के बच्चे हिंदी नहीं बोल पाते। इसके कारण वे अपने दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों से अपनी भाषा में बातचीत नहीं कर पाते। इसी जरूरत को देखते हुए तुषार और मैंने बच्चों को हिंदी सिखाने की पहल शुरू की। भाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार और अपनी जड़ों से जुड़ने का रास्ता भी है।

सवाल: स्थानीय परिषद में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए क्या प्रयास किए गए?

परवीन रानी: पार्षद बनने के बाद परिषद में पहली बार दिवाली और हिंदी दिवस मनाए गए। हमारा उद्देश्य भारतीय संस्कृति को स्थानीय समुदाय के सामने लाना और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ बढ़ाना है। त्योहार लोगों को जोड़ते हैं और एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का अवसर देते हैं। आगे भी इस दिशा में काम जारी रहेगा।

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सवाल: मेयर बनने के बाद भारत आने का अनुभव कैसा रहा?

तुषार दहिया और परवीन रानी: मेयर बनने के बाद भारत की यात्रा हमारे लिए खास रही। यहां ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। अपने देश और अपनी जड़ों से जुड़ाव हमेशा महत्वपूर्ण रहता है। ब्रिटेन में रहते हुए भी हम चाहते हैं कि भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं से हमारा रिश्ता बना रहे।

सवाल: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?

तुषार दहिया: बदलाव लाने के लिए उम्र से ज्यादा जरूरी है कि आप समाज के लिए क्या कर रहे हैं। युवाओं को अपने समुदाय की समस्याओं को समझना चाहिए और छोटे स्तर पर ही सही, सेवा की शुरुआत करनी चाहिए।

परवीन रानी: लोगों के बीच रहकर काम करना, उनकी बात सुनना और विश्वास बनाए रखना बहुत जरूरी है। समाजसेवा का रास्ता निरंतर मेहनत मांगता है, लेकिन इससे मिलने वाला संतोष सबसे बड़ी प्रेरणा है।

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