'कम उम्र में जिम्मेदारी मिली...', पढ़ें ब्रिटेन में मेयर बने रोहतक के तुषार दहिया का Interview; मां भी चुनी गईं महापौर
रोहतक के 23 वर्षीय तुषार दहिया ब्रिटेन में भारतीय मूल के सबसे युवा मेयर बने हैं, जबकि उनकी मां परवीन रानी भी हर्ट्समेरे बोरो काउंसिल की मेयर चुनी गई हैं।

ब्रिटेन के सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर बने तुषार दहिया। फोटो जागरण
HighLights
23 वर्षीय तुषार दहिया ब्रिटेन के सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर।
मां परवीन रानी भी हर्ट्समेरे बोरो काउंसिल की मेयर बनीं।
दोनों ने समाज सेवा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
प्रियंका देशवाल, रोहतक। सेक्टर-34 निवासी 23 वर्षीय तुषार दहिया ब्रिटेन में भारतीय मूल के सबसे युवा मेयर बन गए हैं। उन्हें एल्स्ट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल का मेयर चुना गया है, जबकि उनकी मां परवीन रानी हर्ट्समेरे बोरो काउंसिल की मेयर बनी हैं।
तुषार दहिया और उनकी मां परवीन रानी की यह उपलब्धि रोहतक ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। यह साबित करती है कि सेवा, समर्पण और मेहनत से दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है। मां-बेटे ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में अपने सफर, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं को साझा किया।
पढ़िए तुषार दहिया से बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल: इतनी कम उम्र में ब्रिटेन के सबसे युवा भारतीय मूल के मेयर बनने को कैसे देखते हैं?
जवाब: उम्र कभी भी किसी काम में बाधा नहीं होती। इंसान के अंदर जुनून और मेहनत करने की इच्छा होनी चाहिए। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना गर्व की बात है। इससे लोगों की समस्याओं को समझने और उनके लिए बेहतर तरीके से काम करने का मौका मिलेगा।
20 साल की उम्र में काउंसलर और अब मेयर बनने का सफर कैसा रहा?
जवाब: जब पहली बार काउंसलर बना, तब मैं बीएससी पॉलिटिक्स के दूसरे वर्ष में था। जिस पार्टी से जुड़ा, वह पिछले 30 वर्षों से उस क्षेत्र में जीत नहीं पाई थी। लेकिन मुझे लगा कि पार्टी जमीनी स्तर पर लोगों के लिए काम करती है। मेहनत की और जीत हासिल की। परिवार और दोस्तों का पूरा सहयोग मिला।
चुनाव अभियान के दौरान किन मुद्दों को सबसे ज्यादा उठाया?
जवाब: घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं। कई बार लोगों ने दरवाजा तक नहीं खोला, लेकिन हार नहीं मानी। लोगों ने खासकर बढ़ती महंगाई (कास्ट आफ लिविंग) और ग्रीन स्पेस को लेकर चिंता जताई।
राजनीति में आने की प्रेरणा कहां से मिली?
जवाब: मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा मेरी मां परवीन रानी हैं। कम्युनिटी सर्विस के दौरान लोगों की समस्याओं को करीब से समझा, वहीं से लगा कि राजनीति के जरिए बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है।
भारतीय बच्चों को हिंदी सिखाने की पहल कैसे शुरू हुई?
जवाब: मां से प्रेरणा लेकर यह पहल शुरू की, ताकि भारतीय मूल के बच्चे अपने दादा-दादी से आसानी से बात कर सकें। यह काम आज भी जारी है।
मेयर बनने के बाद आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?
जवाब: बढ़ती जीवन-यापन लागत को कम करने और भारतीय समुदाय तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर काम करूंगा। साथ ही भारतीय समुदाय के हितों को लोकल प्लान में शामिल करवाने की कोशिश रहेगी।
सवाल: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब: उम्र की कोई सीमा नहीं होती। मेहनत, लगन और समाज के लिए कुछ करने की भावना हो तो कोई भी आगे बढ़ सकता है।
मां परवीन रानी से बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल: आप और आपका बेटा एक साथ मेयर बने हैं, यह पल कितना खास है?
जवाब: यह हमारे पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का पल है। मैं हमेशा समाज सेवा से जुड़ी रही हूं और बच्चों को भी यही सीख दी। मां-बेटे का एक साथ मेयर बनना हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है।
सवाल: ब्रिटेन कब गईं और समाज सेवा की शुरुआत कैसे हुई?
जवाब: मैंने हिंदू कॉलेज, सोनीपत से पढ़ाई की और 2013 में परिवार के साथ ब्रिटेन गई। समाज सेवा की प्रेरणा मुझे अपने माता-पिता से मिली। कॉलेज के समय एनएसएस के जरिए सामाजिक कार्य शुरू किए थे।
सवाल: वहां के स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना कितना कठिन था?
जवाब: आसान नहीं था। सिर्फ भारतीय समुदाय के बीच काम करने से बात नहीं बनती। हमने स्थानीय लोगों को भी हर त्योहार और कार्यक्रम में शामिल किया। इसी से उनका भरोसा जीता।
सवाल: भारतीय बच्चों को हिंदी सिखाने की पहल क्यों शुरू की?
जवाब: यूके में पैदा होने वाले कई बच्चों को हिंदी नहीं आती थी और वे अपने दादा-दादी से ठीक से बात नहीं कर पाते थे। इसलिए मुफ्त में हिंदी सिखाने के लिए हिंदी शिक्षा परिषद यूके की शुरुआत की।
सवाल: भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए क्या प्रयास कर रही हैं?
जवाब: हिंदी दिवस, दिवाली जैसे भारतीय त्योहारों को वहां मनाने का काम किया है। भारतीय भाषा और संस्कृति को लेकर लोगों को जागरूक कर रही हूं। इसी काम के लिए सम्मान भी मिला है।
सवाल: भारतीय महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब: हर महिला के अंदर प्रतिभा होती है। जरूरत है आत्मविश्वास की और एक-दूसरे का साथ देने की। जब महिलाएं एक-दूसरे का समर्थन करती हैं, तो बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
सवाल: क्या आगे भी भारत और ब्रिटेन के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने पर काम करेंगी?
जवाब: बिल्कुल। मैं लंबे समय से इस दिशा में काम कर रही हूं और आगे भी भारतीय संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान रहेगा।
