यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सेम ग्रस्त भूमि के लिए कारगर है सब सर्फेस ड्रेनेज सिस्टम
जागरण संवाददाता रोहतक सेम ग्रस्त भूमि को उपजाऊ बनाने में सब सरफेस ड्रेनेज सिस्टम (एसएसडी

जागरण संवाददाता, रोहतक : सेम ग्रस्त भूमि को उपजाऊ बनाने में सब सरफेस ड्रेनेज सिस्टम (एसएसडी) जिला में कारगर साबित हो रहा है। डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जिला के गांव काहनी में इस तकनीक का निरीक्षण किया और मौके पर किसानों से तकनीक के फायदे के बारे में फीडबैक भी ली। इस तकनीक का निरीक्षण करने के उपरांत उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि गांव काहनी कि लगभग 400 एकड़ भूमि में सेम की समस्या थी। परिणाम स्वरूप पिछले लगभग एक दशक से इस एरिया में किसी भी फसल का उत्पादन नहीं हो पा रहा था। लगभग दो वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में एसएसडी सिस्टम को स्थापित किया गया, जिसके माध्यम से इस भूमि से पानी निकाला गया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से भूमि की सतह से अतिरिक्त जल का निकास किया जाता है। फसल को बढ़ने के लिए अच्छी परिस्थितियां प्रदान की जाती है।
क्या है एमएसडी तकनीक
भूमि से पौधों की वृद्धि को उचित वातावरण देने के लिए आवश्यकता से अधिक जल को उचित ढंग से निकालने की प्रक्रिया ही एसएसडी कहलाती है। इस प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि दलदली जमीन में छेद वाले पाइप का जाल बिछाया जाता है और उस के माध्यम से अतिरिक्त पानी को एक कुएं में एकत्रित करके मोटर पंप के माध्यम से उसे दूसरे स्थान पर डाल दिया जाता है।
-सेम ग्रस्त भूमि के लिए लाभदायक तकनीक : किसान दलबीर फोगाट
गांव काहनी के किसान दलबीर फोगाट ने बताया कि उसकी लगभग 40 एकड़ भूमि सेम ग्रस्त थी, जिसके कारण लगभग एक दशक से कोई भी उत्पादन नहीं हो पा रहा था। इस तकनीक के स्थापित होने के उपरांत इस बार एक एकड़ से लगभग 35 क्विटल पीआर धान का उत्पादन लिया है।
-निरीक्षण के उपरांत हुई बैठक
उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने काहनी में सब सर्फेस ड्रेनेज सिस्टम का निरीक्षण करने के बाद कैंप कार्यालय में संबंधित अधिकारियों की बैठक ली तथा उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कैप्टन मनोज कुमार ने सभी उपमंडलाधीशों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सेम ग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को यह सिस्टम लगवाने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि सेम की समस्या दूर करके उनकी आमदनी बढ़ सके।
