केएस मोबिन, रोहतक

कोविड-19 महामारी की वजह से बंद पड़े स्कूलों के संचालन के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) रोहतक ने विकल्प सुझाया है। संस्थान के एक शोध पत्र में बलेंडेड लर्निंग पर मैथेमेटिकल मॉडल पेश किया गया है। महामारी के दौर में इस पद्धति को पढ़ाई का सबसे प्रभावी तरीका बताया गया है। मॉडल में प्रत्येक विद्यार्थी को एक सप्ताह क्लासरूम टीचिग और अगले 14 दिन घर पर ही ऑनलाइन टीचिग-लर्निंग की बात कही गई है।

आइआइएम रोहतक के डायरेक्टर प्रो. धीरज शर्मा ने ऑनलाइन और ऑफलाइन एजुकेशन पैटर्न के मिश्रण की उपयोगिता बताते हुए यह मैथेमेटिकल मॉडल तैयार किया है। शोध पत्र में बताया गया है कि 300 विद्यार्थियों पर परंपरागत और बलेंडेड लर्निंग पैटर्न के अनुसार लिए गए एक टेस्ट के तुलनात्मक अध्ययन में विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में काफी समानता पाई गई। पढ़ाई के इस नए तरीके से विद्यार्थियों के साथ ही अभिभावक भी संतुष्ट नजर आए। वहीं इस तरह के टीचिग मैथेड अपनाकर स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों की संख्या के साथ ही इनकम भी बढ़ा सकते हैं।

कक्षाओं के बने ग्रुप, अलग-अलग हो स्कूल टाइमिग

मॉडल में शारीरिक दूरी के नियमों की पालना के लिए प्राइमरी कक्षा एक से चार, माध्यमिक कक्षा पांच से आठ और सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी कक्षा नौ से 12 के ग्रुप बनाकर तीन शिफ्ट में क्लासरूम टीचिग की बात कही गई है। प्राइमरी के लिए सुबह सात से 11 बजे, माध्यमिक के लिए सुबह 11:30 से साढ़े तीन बजे तक व सेकेंडरी के लिए शाम चार से साढ़े सात बजे की स्कूल टाइमिग तय की गई है।

क्लासरूम टीचिग के बाद 14 दिन क्वारंटाइन

संस्थान के पेश किए मॉडल के अनुसार सप्ताह के तीन दिन क्लासरूम टीचिग के बाद विद्यार्थियों को 14 दिन घर में ही क्वारंटाइन रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करनी होगी। इस तरह से शारीरिक दूरी के नियमों की पालना के साथ ही महामारी से भी बचाव होगा। स्कूलों को मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में नहीं करना होगा बदलाव

मॉडल में स्कूल प्रबंधन की समस्याओं पर भी गौर किया गया है। दावा किया जा रहा है कि संस्थान के द्वारा तैयार इस मॉडल से मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव किए बिना ही विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के साथ ही स्कूल इनकम भी बढ़ेगी। तीन शिफ्ट और सिर्फ चुनिदा दिन क्लासरूम टीचिग होने से स्कूल में दी जा रही सुविधाओं का भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो सकेगा।

यह होती है बलेंडेड लर्निंग

ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की पद्धति को बलेंडेड लर्निंग कहा जाता है। इसमें क्लासरूम टीचिग के साथ ही विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से भी टूटोरियल और टेस्ट दिए जाते हैं। आइआइएम रोहतक के कुछ पाठ्यक्रमों में इस तरह की लर्निंग दी जाती रही है।

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इस तरह के लर्निंग पैटर्न को अपनाकर स्कूल प्रबंधन और योजनाकर्ता अपनी इनकम और क्षमता को बढ़ा सकते हैं। सरकारी स्कूलों के लिए भी यह कारगर है। जिन विद्यार्थियों की आर्थिक हालत सही नहीं उन्हें स्मार्टफोन दिए जा सकते हैं। साप्ताहिक क्विज, टेस्ट आदि से विद्यार्थियों का लर्निंग एसेसमेंट किया जा सकता है। बलेंडेड लर्निंग से स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी।

- प्रो. धीरज शर्मा, डायरेक्टर, आइआइएम, रोहतक।

Posted By: Jagran

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