मछली उत्पादन का नया हब बनेगा रोहतक, कॉमन कार्प की नई पीढ़ी बदलेगी किसानों की किस्मत; नमकीन पानी में भी तेजी से बढ़ेगी
रोहतक के लाहली स्थित केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान में कामन कार्प की तीसरी पीढ़ी पर शोध चल रहा है। यह ...और पढ़ें
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मछली उत्पादन का नया हब बनेगा रोहतक। फोटो जागरण
HighLights
लाहली संस्थान में कामन कार्प की तीसरी पीढ़ी पर शोध।
नई पीढ़ी खारे पानी में बेहतर, तेजी से बढ़ेगी, लाभ बढ़ाएगी।
आनुवांशिक सुधार से मछली उत्पादन को नई पहचान मिलेगी।
विकास सैनी, रोहतक। खेल जगत में खास पहचान बनाने वाले रोहतक का नाम मछली उत्पादन में भी सबसे पहले लिया जाएगा। इस दिशा में कामन कार्प की तीसरी नई पीढ़ी से वैज्ञानिकों को बड़ी उम्मीदें हैं। यह नई पीढ़ी क्षारीय पानी में अधिक अनुकूल रहने के साथ उत्पादक को ज्यादा लाभ भी देगी। तेजी से बढ़ने वाली इस मछली पर केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान लाहली में शोध किया जा रहा है। यह अंतिम चरण की ओर बढ़ गया है।
रोहतक के लाहली गांव स्थित मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान में कामन कार्प पर शोध चल रहा है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से कामन कार्प लाई गई हैं। इनकी ब्रीडिंग करा कर नई पीढ़ी तैयार की जा रही है। यह नई पीढ़ी अपने माता-पिता से बेहतर होगी।
उनसे ज्यादा तेजी से बढ़ेगी। यही नहीं, मीठे पानी के साथ यह शून्य से आठ पीपीटी तक वाले नमकीय पानी में अधिक अनुकूल रहेगी। इससे उत्पादक को ज्यादा लाभ मिलेगा। शोध के तहत कामन कार्प की तीसरी पीढ़ी तैयार की जा रही है। यह अंतिम चरण का शोध पूरा होने पर ही इसके अन्य जगह परिणाम जांचे जाएंगे।
आनुवांशिक सुधार के लिए किया जा रहा काम
केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षण संस्थान मुंबई के रोहतक केंद्र में कामन कार्प पर आनुवांशिक सुधार के लिए काम किया जा रहा है। कामन कार्प की तीसरी पीढ़ी तैयार कर इसके परिणाम देखे जा रहे हैं। अब तक की रिपोर्ट के आधार पर परिणाम सकारात्मक मिलने की उम्मीद है। - डा. सलोनी शिवम, वैज्ञानिक, मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान लाहली।
मीठे पानी की मछली है कामन कार्प
साइप्रिनस कार्पियो। इसे कामन कार्प या यूरोपीय कार्प भी कहा जाता है। यह मीठे पानी की प्रमुख मछली है। यह सिप्रिनिडे परिवार से संबंधित है। यह यूरोप और एशिया की झीलों और बड़ी नदियों के शांत व उथले पानी में पाई जाती है।
इनकी सामान्य लंबाई 30 से 60 सेंटीमीटर (कई बार 1 मीटर तक) और वजन 0.5 से 4 किलोग्राम के बीच होता है। बड़ी कार्प का वजन 15 से 40 किलोग्राम तक भी हो सकता है। इनका रंग हल्का सुनहरा से लेकर गहरा भूरा होता है। पंख लालिमा लिए होते हैं। इनके मुंह के दोनों तरफ बारबेल (मूंछ जैसे अंग) होते हैं।
यह सर्वाहारी मछली है। यह पानी के तल में कीड़े, घोंघे, क्रस्टेशियन, बीज और जलीय पौधे खाती है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार, इसकी प्राकृतिक जंगली आबादी को असुरक्षित माना गया है। दुनिया के कई हिस्सों में इन्हें पाला भी जाता है। कई देशों में इसे आक्रामक प्रजाति के रूप में भी गिना जाता है।
- डा. सत्यप्रकाश, वैज्ञानिक, मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान लाहली।
संस्थान में कामन कार्प पर काम किया जा रहा है। इनकी नई पीढ़ी तैयार की जा रही है। यह अपने माता-पिता से कहीं बेहतर होगी। यह प्रयास मछली पालन को नई ऊंचाई व पहचान दिलाएगा।
- डॉ. मुजाहिद खान पठान, प्रभारी अधिकारी, मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान लाहली।
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