जागरण संवाददाता, रोहतक : बारिश के मौसम में सांपों ने दहशत फैला दी है। औसतन रोजाना 10 लोग पीजीआइएमएस नागरिक अस्पताल और निजी अस्पतालों में सांप के काटने के कारण भर्ती हो रहे हैं। माह में दो से तीन लोगों की मौत भी हो जाती है। मौत का कारण जो सामने आ रहा है, उसमें सांप के जहर से कम व काटने के डर से सदमे व दहशत ज्यादा बताई जा रही है। सोमवार को भी 15 वर्षीय अंकित नाम के किशोर की सर्पदंश से मौत हो गई। सांप कटने से दुनियाभर में होने वाली मौतों की संख्या में भारत सबसे आगे है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल 83,000 लोग सांप के दंश का शिकार होते हैं और उनमें से 11,000 की मौत हो जाती है। मौत का सबसे बड़ा कारण है तुरंत प्राथमिक उपचार न होना। भारत में सांपों की लगभग 236 प्रजातियां हैं। इनमें से ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते हैं। सांपों के शिकार अधिकतर खेतों, ईंट भट्ठों व बाहर जंगल में काम करने वाले लोग हो रहे हैं।

रस्सेल वाइपर व कोबरा है खतरनाक

आम धारणा है कि सभी सांप खतरनाक होते हैं, लेकिन अधिकतर सांप खतरनाक नहीं होते हैं। रस्सेल वाइपर, स्केल्ड वाइपर और कोबरा सांप ही सबसे ज्यादा जहरीले होते हैं। उनके काटने के बाद बचने की उम्मीद कम रहती है। सांप के काटने के तुरंत बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करना चाहिए। पानी में रहने वाले सांप जहरीले नहीं होते हैं। उनके काटने से केवल जख्म होता है। ऐसे में हर सांप के काटने से डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लिया जा सकता।

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हमें याद रखना चाहिए कि सभी सांप खतरनाक नहीं होते, इसलिए सांप के काटने पर घबराना नहीं चाहिए। प्राथमिक उपचार के तौर पर सबसे पहले जहर को फैलने से रोकना चाहिए और मरीज को जल्दी से जल्दी किसी स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाना चाहिए। पीजीआइएमएस में एंटी शनेक विनोम वेक्सीन उपलब्ध है। अगर समय पर मरीज पहुंच जाता है तो अंतराल में यहीं वैक्सीन दी जाती है। सांप के काटने के मरीज को 20 से 30 एवीएम देने की जरूरत रहती है। लेकिन सांप के काटने से अधिकतर लोग दहशत में मर जाते हैं।

डा. संदीप कुमार, डिप्टी मेडिकल सुपरीटेंडेंट, पीजीआइएमएमा, रोहतक

सांप काट ले तो इन बातों को हमेशा याद रखें

- पीड़ित को सांप से दूर ले जाएं और घबराहट दूर करने में उसकी मदद करें

- खुद को सुरक्षित रखते हुए सांप की प्रजाति का पता करें

- सांप के काटने वाली जगह पर कोई गहना पहने हों तो उसे उतार दें

- मरीज जूते पहना हो तो उतार दें, कपड़े सुविधाजनक हों तो न उतारें

- जख्म पर पट्टी बांध दें। पट्टी के लिए पेड़ की छाल, अखबार का टुकड़ा, स्ली¨पग बैग या बैकपैक फ्रेम का इस्तेमाल करें

- जख्म से छेड़छाड़ न करें, पट्टी बांधने के बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं

- मरीज को बिल्कुल चलने न दें, क्योंकि मांसपेशियों की रगड़ से जहर तेजी से फैल सकता है

- मरीज को अपने मन से एस्प्रिन या कोई दर्द निवारक दवा बिल्कुल न दें

यह विधि न अपनाएं

डा. संदीप का कहना है कि आमतौर पर यह मिथक है कि सांप काटी जगह पर रक्त संचार बंद करने के लिए खूब कसकर पट्टी बांध देनी चाहिए और मुंह से खींचकर जहर निकाल देना चाहिए। लेकिन इन चीजों से परहेज करना चाहिए। दरअसल, इनसे नसों और रक्त धमनियों को नुकसान पहुंचने और संक्रमण होने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि मुंह से खींचने पर जहर बहुत कम निकलता है। दबाव वाली पट्टी बांधने से रक्त धमनियां फट सकती हैं और मरीज को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।

Posted By: Jagran