जागरण संवाददात, रोहतक :

युवा प्रत्येक स्थिति में अपने बुलंद और मजबूत इरादों से जाना जाता है। जीविका प्राप्त करने के लिए कागजी डिग्रियों की बढ़ती होड़ ने पूरे समाज को अव्यवस्थित कर दिया है। अपने भीतर झांकने की कला से आज इंसान वंचित है। समग्रता की चाहत में हम अपने भीतरी सुकून को समाप्त कर रहे हैं। यह कहना है बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल राजेंद्र ¨सह यादव का। शुक्रवार को विश्वविद्यालय के सभी विभागों में इंडक्शन एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति मेजर जनरल यादव ने कहा कि जीवन में डिग्रियों के साथ-साथ काबिलियत का होना अधिक आवश्यक है। काबिलियत के बिना किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात् अब विश्वविद्यालय या कॉलेज स्तर पर हमें शिक्षा के किताबी ज्ञान से बाहर निकलकर उसके व्यावहारिक ज्ञान को जीवन में उतारना होगा। शिक्षा की व्यवहारिकता को समझना होगा। उन्होंने युवा शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि नवभारत निर्माण हम सबकी जिम्मेदारी है। स्वच्छ, सुंदर वातावरण बनाना हमारा दायित्व है। अपने आसपास सदैव सकारात्मक लोगों को जोड़ें और समाज कल्याण में अपना विशेष योगदान दें।

Posted By: Jagran