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PG में दाखिले के लिए अब नहीं अटकेंगे MBBS ग्रेजुएशन के मूल दस्तावेज, हरियाणा सरकार ने दी वापसी की मंजूरी

Published: Sat, 31 Oct 2026 02:14 PM (IST)

हरियाणा सरकार ने पीजी में प्रवेश पाने वाले एमबीबीएस स्नातकों को मूल दस्तावेज लौटाने की अनुमति दी है।

PG में दाखिले के लिए अब नहीं अटकेंगे MBBS ग्रेजुएशन के मूल दस्तावेज (प्रतीकात्मक फोटो)

PG में दाखिले के लिए अब नहीं अटकेंगे MBBS ग्रेजुएशन के मूल दस्तावेज (प्रतीकात्मक फोटो)


HighLights

  1. पीजी दाखिले के लिए एमबीबीएस स्नातकों को मिलेंगे मूल दस्तावेज।

  2. अलॉटमेंट लेटर और अंडरटेकिंग जमा करने पर होगी वापसी।

  3. पीजी नहीं मिलने पर बांड के लिए तीन विकल्प उपलब्ध।

जागरण संवाददाता, रोहतक। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले 2020-21 बैच के स्नातकों को मूल दस्तावेजों के मामले में बड़ी राहत मिली है।

राज्य सरकार ने शुक्रवार को निर्देश जारी कर पीजी में प्रवेश प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों के मूल दस्तावेज लौटाने का रास्ता साफ कर दिया है। लंबे समय से इस मांग को उठा रहे विद्यार्थियों को अब निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर दस्तावेज मिल सकेंगे। इससे नीट-पीजी 2026 के माध्यम से सीट प्राप्त करने वाले उन युवा चिकित्सकों को राहत मिलेगी, जिन्हें दाखिले के लिए मूल दस्तावेजों की जरूरत है।

हरियाणा के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी इस मुद्दे पर अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके थे और बैठकों में भी अपनी समस्या रख चुके थे। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीजी अलाटमेंट लेटर और निर्धारित अंडरटेकिंग जमा कराने पर संबंधित कॉलेज विद्यार्थियों के दस्तावेज जारी करेंगे।

बाहर पीजी करने वालों को तीन सप्ताह में दस्तावेज लौटाने होंगे

सरकार ने हरियाणा और दूसरे राज्यों में पीजी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अलग प्रावधान किए हैं। राज्य से बाहर पीजी करने वाले स्नातकों को पाठ्यक्रम पूरा होने के तीन सप्ताह के भीतर अपने मूल दस्तावेज संबंधित यूजी मेडिकल कालेज में दोबारा जमा कराने होंगे। पीजी पूरी करने के बाद सभी विद्यार्थियों को बान्ड पालिसी के अनुसार शेष सरकारी सेवा भी पूरी करनी होगी।

पीजी सीट नहीं मिली तो तीन विकल्प

इस वर्ष पीजी में प्रवेश नहीं पाने वाले स्नातकों को पालिसी के क्लाज 5.A.2 के तहत तीन विकल्प दिए गए हैं। वे हरियाणा सरकार के अधीन बान्ड के अनुसार सेवा देने की सहमति दे सकते हैं।

दूसरा विकल्प निर्धारित बान्ड राशि का एकमुश्त भुगतान और तीसरा मासिक किस्तों में भुगतान का है। विद्यार्थियों को अपना विकल्प 2 नवंबर 2026 तक देना होगा।

दस्तावेज जारी करने में देरी न हो, इसके लिए चारों सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निदेशक और डीन कार्यालय शनिवार सहित अवकाश के दिनों में भी खुले रखने के निर्देश दिए गए हैं। कॉलेजों को विद्यार्थियों के विवरण और उनके चुने गए विकल्प तय समय में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) को भेजने होंगे।

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