हरियाणा के शिक्षक ने पढ़ाई को बना दिया खेल, सांप-सीढ़ी की चाल से सुलझा रहे गणित की गुत्थी; राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
रोहतक के गणित अध्यापक अनिल कौशिक ने सांप-सीढ़ी जैसे खेलों से गणित सिखाने के लिए वर्चुअल मैथमेटिक्स लैब तैयार की है।

सांप-सीढ़ी की चाल से गणित की गुत्थी सुलझा रहे रोहतक अनिल कौशिक।
HighLights
अनिल कौशिक ने वर्चुअल मैथमेटिक्स लैब का निर्माण किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा
सांप-सीढ़ी जैसे खेलों से गणित सिखाने का नवाचार
प्रियंका देशवाल, रोहतक। सांप-सीढ़ी का खेल हो या ताश के पत्ते, अनिल कौशिक ने इन्हें गणित सीखने का माध्यम बनाया है। सांघी गांव के राजकीय माडल संस्कृति विद्यालय के गणित अध्यापक कौशिक ने करीब एक साल की मेहनत से वर्चुअल मैथमेटिक्स लैब तैयार की है।
इसके 12 भागों में एनसीईआरटी की किताबों, प्रयोगों, प्रश्नोत्तरी, असाइनमेंट और वैदिक गणित से जुड़ी सामग्री उपलब्ध है। लिंक और क्यूआर कोड से विद्यार्थी घर बैठे भी इसका उपयोग कर सकते हैं। अभी एक हजार विद्यार्थी इसका लाभ ले रहे हैं, जबकि जिला स्तर पर लिंक साझा किए जाने से 200 अन्य स्कूलों तक भी यह सामग्री पहुंची है।
इस नवाचार और शिक्षण कार्य के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर अनिल कौशिक को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया। कौशिक को शिक्षक दिवस पर राज्य पुरस्कार भी मिल चुका है।

इसके अलावा उनके विद्यालय को वर्ष 2020 में गणित यशस्वी अवॉर्ड मिला था और गणित विषय का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। वर्ष 2015 से विद्यार्थी माडल प्रदर्शनी में चार बार राज्य स्तर पर पुरस्कार जीत चुके हैं।
खेल में चाल, हिसाब में गणित
सांप-सीढ़ी से बच्चे गिनती, संख्या पहचानने, जोड़ने और घटाने का अभ्यास करते हैं। पासे पर आए अंकों के अनुसार गोटी आगे बढ़ाते समय उन्हें गणना करनी होती है। मसलन, गोटी 25वें खाने पर है और पासे पर छह अंक आते हैं तो बच्चा 25 में छह जोड़कर 31वें खाने तक पहुंचता है। इसी तरह 50वें खाने पर पहुंची गोटी को सांप के कारण 20 खाने पीछे आना पड़े तो बच्चा 50 में से 20 घटाकर 30 तक पहुंचने का हिसाब लगाता है।

खेल से संख्याओं की तुलना और उनके बीच का अंतर निकालने का अभ्यास भी कराते हैं। यदि एक बच्चे की गोटी 90वें खाने पर और दूसरे की 40वें खाने पर है तो वे समझ सकते हैं कि 90, 40 से बड़ी संख्या है। दोनों के बीच का अंतर निकालने से घटाव का अभ्यास भी होता है। इस तरह खेल की चाल गणितीय सवाल हल करने का जरिया बनती है।
12 भागों में बंटी डिजिटल गणितशाला
करीब एक साल की मेहनत से तैयार वर्चुअल मैथमेटिक्स लैब में विद्यार्थी जरूरत के अनुसार संबंधित भाग चुन सकते हैं। इसमें एनसीईआरटी की किताबें, वैदिक गणित, प्रश्नोत्तरी, असाइनमेंट और गणितीय प्रयोग शामिल हैं।

प्रयोगों के वीडियो से विद्यार्थी प्रक्रियाओं को देखकर समझ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सामग्री दोबारा खोलकर अभ्यास कर सकते हैं। कौशिक ने क्षेत्रफल निकालने के लिए एक पहेली भी तैयार की है। इसका उद्देश्य गणितीय अवधारणा को गतिविधि के जरिये समझने का अवसर देना है।
क्यूआर कोड से घर तक पहुंची पढ़ाई
लिंक या क्यूआर कोड के जरिये विद्यार्थी विद्यालय के बाहर भी अध्ययन सामग्री तक पहुंच सकते हैं। इसमें प्रश्नोत्तरी और असाइनमेंट से विद्यार्थी अपनी तैयारी परख सकते हैं और जरूरत के अनुसार दोबारा अभ्यास कर सकते हैं।

पूर्व प्राचार्य जयपाल दहिया के अनुसार, जिला स्तर पर अन्य स्कूलों से इसका लिंक साझा किया गया है, जिससे 200 अन्य स्कूलों के विद्यार्थी भी इसका उपयोग कर रहे हैं। अभी एक हजार विद्यार्थी इस सुविधा का लाभ ले चुके हैं।
