रोहतक, [बृजेश कुमार मिश्र]। हेल्थ यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के एडमिशन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पांच छात्रों ने छह लाख से अधिक वार्षिक आय होने के बाद भी फर्जी आय प्रमाण पत्र बनवाकर यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। वहीं यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने भी बिना किसी जांच के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर उनकी एडमिशन प्रक्रिया पूरी भी कर दी।

पांच छात्रों ने गलत आय प्रमाण पत्र देकर लिया एडमिशन, आरटीआइ से उजागर हुआ मामला

आरटीआइ से मिली जानकारी से यह फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसके बाद मामले की शिकायत यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को दी गई है। इसके बाद अधिकारियों ने छात्रों को नोटिस थमा दिए और उनसे आय को प्रमाणित कराने को कहा है। साथ ही पूरे मामले की जानकारी सरकार के पास भी भेजी है। उधर सोमवार को यूनिवर्सिटी में चल रही मॉप अप काउंसिलिंग के दौरान कमेटी द्वारा फिजिकल हैंडीकैप्ड श्रेणी की बची सीटों को एक्स सर्विस मैन व फ्रीडम फाइटर में बदलने को लेकर काफी बवाल हुआ।

पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के तहत मेडिकल की पढ़ाई के लिए एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिले की प्रक्रिया चल रही है। जुलाई में पहली काउंसलिंग के दौरान आरक्षण को लेकर कुछ छात्र हाई कोर्ट चले गए थे और कोर्ट ने काउंसलिंग रद कर दी थी। इसके बाद अगस्त में दूसरी काउंसलिंग हेल्थ यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए रद कर दी थी। अब तीसरी बार काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही थी। इसमें भी धांधली सामने आई है।

रोहतक निवासी जयप्रकाश द्वारा आरटीआइ के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में यह सामने आया कि पांच छात्रों ने काउंसलिंग के दौरान फर्जी आय प्रमाण पत्र दिखाकर एडमिशन ले लिया। जयप्रकाश के मुताबिक सरकार का नियम है कि छह लाख से कम वार्षिक आय वाले छात्रों को पहले एडमिशन दिया जाएगा। आरोपित पांचों छात्रों ने इसी का फायदा उठाया। आरोप है कि छात्रों के परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक है लेकिन फिर भी उन्होंने फर्जी प्रमाण बनवाकर आय कम दिखाई और इसी फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे दाखिला भी ले लिया है।

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'' संबंधित पांचों छात्रों को आय प्रमाण पत्र वेरीफाई कराने को कहा गया है और इसी संबंध में सरकार को भी सूचना भेजी जा चुकी है। अगर प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं तो नियमानुसार छात्रों का दाखिला रद भी किया जा सकता है। फिजिकल हैंडीकैप्ड की सीटों को सरकार के नोटिफिकेशन के नियमानुसार ही दूसरी श्रेणी में बदला गया है।

                                                                  - डाॅ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार, हेल्थ यूनिवर्सिटी, रोहतक।

Posted By: Sunil Kumar Jha