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जिगर के टुकड़े के लिए लुटा दी जमापूंजी, सोनीपत के ड्राइवर ने बेटे की जान बचाने पर खर्च किए 14 लाख; फिर भी राहत नहीं

By Priya PanwarEdited By: Prince Sharma
Published: Sat, 10 Oct 2026 09:41 AM (IST)

सोनीपत के दंपती सोमबीर और उषा अपने 8 वर्षीय बेटे दक्ष के इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसने दो साल वेंटिलेटर पर बिताए हैं।

पीजीआइएमएस में ही मनाया गया था दक्ष का जन्मदिन।

पीजीआइएमएस में ही मनाया गया था दक्ष का जन्मदिन। 


HighLights

  1. दक्ष दो साल वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा।

  2. पीजीआईएमएस रोहतक से छुट्टी के बाद हालत फिर बिगड़ी।

  3. इलाज पर अब तक 14 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

प्रिया पंवार, रोहतक। जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए सोनीपत जिले के गढ़ी सिसाना निवासी दंपती सोमबीर और उषा जमीन-आसमान एक किए हुए हैं। दो साल के लंबे अंतराल में वो बमुश्किल कुछ घंटे ही घर पर रहे हैं।

दरअसल, दो साल वेंटिलेटर और 100 प्रतिशत ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने के बाद पीजीआइएमएस की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) से छुट्टी मिलने के बाद घर जाते ही आठ साल के दक्ष की हालत फिर बिगड़ गई और इसी के चलते परिवार को फिर से पीजीआइएमएस भागना पड़ा।

बता दें कि दक्ष को 5 अक्तूबर 2024 को छह साल की उम्र में पीजीआइएमएस में लाया गया था। तेज बुखार की वजह से बेहोशी की हालत में उसके हाथ पैर भी नहीं हिल रहे थे।

वेंटिलेर सपोर्ट पर रखा है बच्चे को

डॉक्टरों ने बच्चे को पीआइसीयू में 100 प्रतिशत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। हालत में सुधार होने पर पांच अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन 12 घंटे बाद ही माता-पिता अपने बेटे को अस्पताल में फिर से ले आए।

यहां उसका इलाज जारी है। दिल्ली में एक ड्राइवर के तौर पर नौकरी करते घर के इकलौते कमाने वाले सोमबीर दहिया अब तक दक्ष के इलाज पर करीब 14 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

दो साल पहले खूब बातें करता था दक्ष

सोमबीर ने बताया कि दो साल पहले उनका बेटा उनसे खूब बातें करता था। खेलता था और अपनी मां की भी काफी मदद करता था। हमारा परिवार काफी खुश था। मजबूरी में हम तीनों को घर छोड़ना पड़ा।

दो साल से अपने घर नहीं जा पाए थे। सारा काम छोड़ बेटे की देखरेख में लगे हुए हैं। दक्ष का जन्मदिन और हर त्योहार यहीं पीजीआइएमएस में ही मन रहा है।

हालांकि यहां भी घर जैसा ही हो गया है। डाक्टर बच्चे को बचाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। अच्छा बिस्तर दिया गया है। कमरे में धूप के लिए दरवाजा खोलने की भी परमिशन दी गई है।

जब अस्पताल से छुट्टी मिली तो खुश होकर दोनों अपने बेटे को लेकर निकले थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। हर वक्त बेटे को निहारती रहती उषा भगवान से ये ही प्रार्थना करती रहती हैं कि वह जल्द ठीक हो जाए।