संवाद सहयोगी, लाखनमाजरा :

क्षेत्र में बेसहारा गोवंश ग्रामीणों व राहगीरों के लिए आफत बनते जा रहे हैं। एक तरफ जहां ये गोवंश रोड पर रहने के कारण दुर्घटनाओं का सबब बनते जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए भी आफत बने हुए हैं। ग्रामीण कई बार इन्हें इकट्ठा कर गोशाला में पैसे देकर छोड़ चुके हैं। मगर कुछ दिनों में ही दोबारा फिर सड़क पर आ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गोशाला में पैसे लेकर इन्हें रख लिया जाता, मगर कुछ दिनों बाद ही गोशाला संचालक इन्हें फिर छोड़ देते हैं और हालात फिर वहीं हो जाते हैं। लाखनमाजरा से राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग गुजरते हैं, ऐसे में इन दोनों रोड पर ट्रैफिक काफी व्यस्त रहता है। मगर रोड पर इन गोवंश के होने के चलते अक्सर दुर्घटना का कारण बन जाते हैं। इतना ही नहीं कई बार तो ये गोवंश आपस में भीड़ जाते हैं। ऐसे में कई बार राहगीर हादसों का शिकार हो चुके हैं। वहीं ये गोवंश मुख्य चौक के आसपास रोड पर ही बैठ जाते हैं, जिसके चलते राहगीरों को तो परेशानी होती ही है साथ ही जाम की स्थिति से भी दो चार होना पड़ता है। ग्रामीण कई बार इस समस्या को लेकर अधिकारियों से मिल चुके हैं, मगर कोई समाधान नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीण सिद्धराज राठी का कहना है कि रात के समय जब मच्छरों का प्रकोप होता है। तो अपने आपको मच्छरों से बचाने के लिए गाय रोड पर खड़ी हो जाती हैं। जिससे आने वाली गाड़यिों को वह दिखाई नहीं देती। परिणामस्वरूप ट्रक या अन्य भारी वाहन की चपेट में आ जाती हैं। वहीं अगर कोई बाइक सवार या छोटा वाहन उनसे टकरा जाता है तो राहगीरों के लिए भी आफत बन सकती है। अभी सोमवार को ही एक गाय व एक खच्चर वाहनों की चपेट में आ अपनी जान गवां चुके हैं। मास्टर का कहना है कि अगर हर एक गाय के गले में एक रेडियम टेप का पट्टा लटकाया जाए तो कुछ हद तक इन हादसों से बचने में मदद मिल सकती है। लेकिन वो कहां और कैसे उपलब्ध होगी, इस बारे में प्रशासन व एनएचएआइ को विचार करना चाहिए।

Posted By: Jagran