जागरण संवाददाता, रोहतक : नगर निगम प्रशासन की लापरवाही ने शहरी जनता की जान आफत में डाल दी है। हालात इतने विस्फोटक हो गए हैं कि लावारिस पशुओं का डेरा बीच सड़क पर जम गया है। अफसर टीमें भेजकर लावारिस पशुओं को पकड़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन शहर में ऐसा नहीं दिख रहा कि पशु पकड़े जा रहे हैं। हेल्प लाइन नंबर भी काम नहीं आ रहा है। शहर में धड़ल्ले से लावारिस पशु सड़कों और कॉलोनियों में घूम रहे हैं। शनिवार को तो हालात ज्यादा ही बिगड़ गए थे। क्योंकि बीच सड़क पर लावारिस पशु खड़े हुए थे। राहगीर और वाहन चालक बमुश्किल निकल सके। सोनीपत रोड से तो रात में वाहन चालक लावारिस पशुओं से बचकर निकले। दैनिक जागरण रात में प्रमुख मार्गों को देखा तो हैरान करने वाले मिले हालात

दैनिक जागरण की टीम ने शनिवार को सोनीपत रोड, झज्जर रोड, दिल्ली बाइपास, दिल्ली रोड, सैनी स्कूल मार्ग, शीला बाइपास आदि स्थानों को चेक किया। चौंकाने वाली बात यह थी कि अफसर लगातार दावे करते दिखे कि लावारिस पशुओं से 15 अगस्त तक छुटकारा मिलेगा। लेकिन सोनीपत रोड पर कई स्थानों पर बीच सड़क पर पशु बैठे हुए थे। सोनीपत रोड स्थित रेलवे क्रॉ¨सग के निकट भी लावारिस पशुओं का डेरा सड़क पर ही जमा हुआ था। जबकि यहां सर्वाधिक भीड़ रहती है। संत और संगठन भी हो गए चुप

सितंबर 2016 में संत और संगठनों ने लावारिस पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन किया था। संत धरने पर बैठ गए थे तो चंडीगढ़ तक खलबली मच गई थी। कई मंत्रियों से लेकर गो सेवा आयोग के चेयरमैन डा. भानीराम मंगला तक रोहतक में दौड़े चले आए थे। उस दौरान यह भी वार्ता हुई थी कि सड़क व कॉलोनियों से पशु पकड़कर गोशालाओं में भेजे जाएंगे। बाद में लावारिस पशु पकड़कर गोशालाओं में छोड़े गए, लेकिन फिर से पशु सड़कों पर आ गए। गोशालाओं से नगर निगम की तनातनी, बकाए का भुगतान अटका

नगर निगम प्रशासन और गोशाला संचालकों के बीच आपस में तनातनी पिछले दो साल से चल रही है। गोशाला संचालकों का दावा है कि उन्हें सरकार ने 50 रुपये प्रति पशु रखने का खर्चा देने का आश्वासन दिया था। मगर सरकार अब सिर्फ 36 रुपये देने का दावा कर रही है। कोर्ट केस भी इस प्रकरण में हो चुके हैं। गोशालाएं फुल होने के दावे, अब लावारिस पशु जाएंगे कहां

नगर निगम की पहरावर स्थित गोशाला का निर्माण हो चुका है और इसी साल जनवरी से संचालन भी शुरू हो चुका है। दावा किया जा रहा है कि इस गोशाला में करीब 2500 से अधिक लावारिस पशु हैं। नगर निगम के पैनल में शामिल दूसरी दो से तीन निजी गोशालाओं ने पशु लेने से इन्कार कर दिया है। अब पशु कहां जाएंगे। वर्जन

हमें तो ऐसा लगता है कि नगर निगम प्रशासन को किसी हादसे का इंतजार है। पहले भी रोहतक में लावारिस पशुओं के कारण हादसे हो चुके हैं। नगर निगम के अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं।

संत कुमार, राहगीर, भिवानी स्टैंड निवासी

--

लावारिस पशुओं से छुटकारा दिलाना प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन सेक्टरों में अभी भी लावारिस पशु खूब दिख रहे हैं। यदि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि लावारिस पशु पकड़े जा रहे हैं तो वह गलत कह रहे हैं।

एडवोकेट दीपक दहिया, स्थानीय निवासी, सेक्टर-3

Posted By: Jagran