जागरण संवाददाता, रोहतक :

अहोई अष्टमी व्रत सोमवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु और उनकी मंगल कामना के लिए व्रत रखेंगी। ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि करवा चौथ के चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। महिलाओं के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ व्रत के बाद काफी अहम होता है। महिलाएं यह व्रत अपनी संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। दिन में महिलाएं अहोई माता की कहानी सुनेंगी और शाम को व्रत खोलेंगी। वहीं शाम को ही घर परिवार के बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लेंगी और उनको उपहार देकर सम्मानित भी करेंगी। त्योहार को लेकर रविवार को भी बाजारों में खूब चहल पहल बनी रही। महिलाओं ने पर्व से पहले ही आवश्यक वस्तुओं की जमकर खरीदारी की।

दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन पड़ता है। इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 21 अक्टूबर को रखा जाएगा। करवा चौथ के बाद महिलाओं के लिए अहोई अष्टमी व्रत का काफी महत्व है। करवाचौथ का व्रत महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं तो वहीं अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र और उनकी मंगल कामना के लिए करती हैं। जिन महिलाओं की कोई संतान नहीं हैं वे भी संतान सुख के लिए ये व्रत करती हैं। तारों और चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अहोई अष्टमी का व्रत खोला जाता है।

हिदू शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत रखने से अहोई माता खुश होकर बच्चों की सलामती और मंगलमय जीवन का आशीर्वाद देती हैं।

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त

पूजा समय : शाम 05:45 बजे से 07:02 बजे तक

तारों के दिखने का समय : शाम 06:10 बजे से।

Posted By: Jagran

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